Ayodhya Deepotsav: अयोध्या में रविवार, 19 अक्टूबर को भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिसने एक बार फिर इतिहास रच दिया। भगवान श्रीराम की नगरी इस अवसर पर 26 लाख से अधिक दीपों की रोशनी से जगमगा उठी और 2 नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए गए।

Ayodhya Deepotsav: आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया
पहला रिकॉर्ड 56 घाटों पर एक साथ 26 लाख 17 हजार 215 दीप जलाकर बना। दूसरा रिकॉर्ड सरयू तट पर आयोजित महाआरती के दौरान 2128 लोगों के एक साथ भाग लेने से दर्ज हुआ। पूरा सरयू घाट दीपों की झिलमिल रोशनी में नहाया हुआ नजर आया, जिसने आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
देखने हजारों श्रद्धालु घाटों पर उमड़ पड़े
इस कार्यक्रम में दीपों की गिनती के लिए 112 ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि पूरे आयोजन की भव्यता को दिखाने के लिए 1100 ड्रोन से शानदार लेजर लाइट शो किया गया। आसमान में रामायण की झलकियों और भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को रोशनी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु घाटों पर उमड़ पड़े।

बड़ी संख्या में विद्यार्थी व स्वयंसेवी संगठन जुड़े रहे

दीपोत्सव की तैयारी कई दिनों से चल रही थी। लाखों दीपों को जलाने के लिए लगभग 75 हजार लीटर तेल और 55 लाख रुई की बत्तियों का उपयोग किया गया। आयोजन में यूपी सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी व स्वयंसेवी संगठन जुड़े रहे।
रोशनी की अनंत धारा से आलोकित कर रहे थे

सरयू घाट पर आरती का दृश्य मनमोहक रहा। ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जब दीयों की लौ लहराई, तो पूरा वातावरण राममय हो गया। श्रद्धालु ‘जय श्रीराम’ के जयघोष करते हुए भगवान राम की अयोध्या को रोशनी की अनंत धारा से आलोकित कर रहे थे।
भारत की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रकाश भी
दीपोत्सव का यह 9वां संस्करण था, जो पिछले वर्षों से भी अधिक भव्य और तकनीकी रूप से उन्नत रहा। आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी उपस्थित रहकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह श्रृंखला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रकाश भी है।
Ayodhya Deepotsav: एक बार फिर स्वर्गलोक की भांति प्रकाशित हो उठी
कार्यक्रम के दौरान अयोध्या शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हर घाट और सड़क पर प्रकाश, संगीत और सजावट का मनोहारी समन्वय देखने को मिला। अंत में आतिशबाज़ी ने पूरे वातावरण को रंगों से नहला दिया, और अयोध्या एक बार फिर स्वर्गलोक की भांति प्रकाशित हो उठी।
