Axiom‑4 Mission 25 June: 6 बार टला, लेकिन अब Axiom‑4 मिशन लॉन्च होगा 🚀
Axiom‑4 Mission 25 June: 25 जून 2025 दोपहर 12:01 पर संभावित लॉन्च टाइम की घोषणा करते ही Indian astronaut Shubhashu Shukla का नाम अंतरिक्ष के इतिहास में फिर चमकने लगा है। यह वही पल हो सकता है जब वह चौथे Axiom Mission‑4 (Ax‑4) के साथ ISS (International Space Station) की ओर उड़ान भरेंगे। अगर सब कुछ समय पर हुआ, तो अगले दिन यानी 26 जून शाम 4:30 बजे उनके स्पेसक्राफ्ट का डॉकिंग ISS से हो सकता है।
इस ऐतिहासिक मिशन की जानकारी महज मंगलवार को NASA ने साझा की, लेकिन इसमें न सिर्फ शुभांशु बल्कि तीन और अंतर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनॉट शामिल हैं।
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👩🚀 मिशन की टीम – चार देशों का संकल्प
- कमांडर – पैगी व्हिटसन (अमेरिका)
- मिशन पायलट – शुभांशु शुक्ला (भारत)
- मिशन एक्सपर्ट – टिबोर कापू (हंगरी)
- मिशन एक्सपर्ट – स्लावोज उज़्नान्स्की‑विस्निव्स्की (पोलैंड)
यह टीम 14 दिन तक ISS पर वैज्ञानिक और चिकित्सा प्रयोग करेगी। शुभांशु अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय होंगे — पहला नाम है राकेश शर्मा (1984, सोवियत मिशन)।
📅 6 बार टल चुका है, पर अब उम्मीद फिर से जिंदा
इस मिशन की लॉन्च डेट 6 बार बदल चुकी हैं –
29 मई, 8 जून, 10, 11, 12 और फिर 22 जून – SCI/ ISS के Zvezda सर्विस मॉड्यूल में हुए रखरखाव के कारण। हमेशा की तरह, सुरक्षा जांच और मॉड्यूल रिव्यू के आधार पर मिशन को स्थगित किया गया।
अब पर उम्मीद है कि 25 जून को सब ठीक रहेगा और Falcon‑9 रॉकेट समय पर लॉन्च करेगा।
🧪 इतिहास की पहली बार: अंतरिक्ष में ग्लूकोज‑इंसुलिन रिसर्च
Ax‑4 मिशन का सबसे अनोखा पहलू है — डायबिटीज रिसर्च। UAE की ‘बुर्जील होल्डिंग्स’ आई है, जो नवंबर से Glucose behaviour in microgravity पर अध्ययन करेगी।
- सभी चार एस्ट्रोनॉट 14 दिन तक मॉनिटरिंग डिवाइस पहनेंगे
- अंतरिक्ष में इंसुलिन पेन अलग-अलग तापमानों में रखे जाएंगे
- इसका उद्देश्य: माइक्रोग्रैविटी का ग्लूकोज‑इंसुलिन पर असर समझना
इस रिसर्च से ना केवल अंतरिक्ष यात्रियों को होगा लाभ, बल्कि मधुमेह के मरीजों के लिए वियरेबल टेक्नॉलॉजी भी उन्नत हो सकेगी।
🌟 ‘शुगर पेशेंट’ यात्रा पर पहली चुनौती
NASA अभी तक इंसुलिन का नियमित प्रयोग करने वाले मरीजों को परमिट नहीं देता। लेकिन इंसुलिन-नॉट‑टेकर्स के लिए कोई बैन नहीं।
Ax‑4 मिशन के साथ पहली बार इंसुलिन-पेन के साथ एक शुगर‑पेयी मरीज अंतरिक्ष में कदम रख सकता है। यह एक महत्वपूर्ण मेडिकल माइलस्टोन होगा।
🧬 60+ प्रयोग, जिनमें 7 भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान
इस मिशन में कुल 60 प्रयोग होने हैं। इनमें से 7 प्रोजेक्ट्स का लिंक सीधे भारतीय वैज्ञानिकों से जुड़ा है, जैसे:
- स्प्राउट्स की अंकुरण प्रक्रिया
- विभिन्न बीजों पर माइक्रोग्रैविटी का इफेक्ट
- एल्गी पर रेडिएशन और गुरुत्वाकर्षण प्रभाव
इससे भारत के विज्ञान समुदाय को बड़े पैमाने पर लाभ मिलेगा और अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी भागीदारी बढ़ेगी।
🔍 आगे क्या? – Launch Timeline & Checkpoints
- शेड्यूल लॉन्च: 25 जून, Indian Time 12:01 PM
- Falcon‑9 रॉकेट इग्निशन + Dragon स्पेसक्राफ्ट विभाजन
- इंटरऑर्बिटल फ्लाइट – लगभग 24 घंटे
- ISS डॉकिंग: 26 जून शाम 4:30 बजे IST
- 14 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयास + एक्सपेरिमेंट्स
- नियंत्रित रिटर्न – Capsule पृथ्वी पर सुरक्षित लैंडिंग
📝 एक नया पेज भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में
Ax‑4 मिशन केवल शुभांशु शुक्ला के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।
SpaceX और NASA की यह साझेदारी एक कदम और है अंतरिक्ष में विज्ञान और मानवता को जोड़ने का।
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