Aungari Dham Sun Temple: नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड में स्थित औंगारी धाम बिहार का एक प्रसिद्ध सूर्योपसना स्थल है। यह केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक कथाओं का अद्भुत संगम भी है। यह माना जाता है कि द्वापर युग से ही यहां सूर्योपासना का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां हर ईंट में श्रद्धा और भक्ति झलकती है।
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मंदिर मुख्यालय से लगभग 3 KM दूर स्थित है और इसका सूर्य मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर खुलता है, जो इसे देश में अद्वितीय बनाता है।
पौराणिक कथा से जुड़ी उत्पत्ति…
कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था। स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्होंने औंगारी धाम में सूर्य देव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें स्वस्थ किया।

राजा शाम्ब द्वारा निर्मित सूर्य तालाब आज भी उस पौराणिक कथा का साक्षी है और इसे सूर्यनगरी के रूप में पहचान दिलाता है।
सूर्योपासना का प्रमुख केंद्र क्यों?
औंगारी धाम ट्रस्ट के सदस्य एसके पांडेय के अनुसार, यह मंदिर द्वापर कालीन है और बिहार सरकार से अभिप्रमाणित भी है। यहां भक्त वंश प्राप्ति, कुष्ठ रोग मुक्ति और मनोकामनाएं लेकर आते हैं। ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि द्वापर काल में इस क्षेत्र में सूर्योपासना के अनेक केंद्र स्थापित हुए थे और तभी से औंगारी धाम कुष्ठ निवारण और सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध रहा।
पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार का रहस्य…
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह देश का एकमात्र सूर्य मंदिर है जिसका मुख्य दरवाजा पश्चिम की ओर है। कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के काल में मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया, लेकिन जब सेनापति ने मंदिर की दिव्यता को चुनौती दी, तो मंदिर का दरवाजा अपने आप पूरब से पश्चिम दिशा में घूम गया।

12 सूर्यपीठों में शामिल…
औंगारी धाम देश के 12 प्रमुख सूर्यपीठों में शामिल है। यह बिहार में सूर्योपासना का सबसे प्रसिद्ध केंद्र माना जाता है। छठ पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और हर रविवार नियमित पूजा-अर्चना होती है।
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर निर्धन को धन और निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है।
स्थानीय लोगों की आजीविका…
औंगारी धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत भी है। लगभग 300 लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंदिर से जुड़े हैं, जो श्रद्धालुओं की सेवा और पर्व-त्योहारों की तैयारी में लगे रहते हैं।
