आसमान में उड़ानों की सुरक्षा को मिला नया ‘कंट्रोल’

अब हर ATCO की ट्रेनिंग होगी पारदर्शी और जवाबदेह
सोचिए एक पल के लिए—आप हवाई जहाज में बैठे हैं, और आसमान में एक गलत निर्देश की वजह से दो प्लेन आमने-सामने आ जाएं।
खौफनाक, है ना?
ऐसे ही खतरों को जड़ से मिटाने के लिए अब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम को पूरी तरह से रिवाइज किया जा रहा है।
DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने 6 सख्त नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है, जो भारत में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATCO) की ट्रेनिंग, परीक्षा, और कामकाज की पारदर्शिता व गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे।
अब कंट्रोल टावर में “बिना जांच” कोई ट्रेनी नहीं जा सकेगा
पहले कई बार देखा गया कि ट्रेनिंग के दौरान बिना पर्याप्त मूल्यांकन के ट्रेनी ऑफिसर को कंट्रोल टावर तक पहुंच मिल जाती थी।
अब ये साफ तौर पर बैन कर दिया गया है।
हर ट्रेनी को जांच और फिटनेस के बाद ही कंट्रोल टावर में एंट्री दी जाएगी। ये कदम सिर्फ कागज़ी नहीं है, ये प्लेन क्रैश जैसे हादसों को रोकने की ठोस कोशिश है।
DGCA के नए 6 नियम: जो बदल देंगे भारतीय ATC सिस्टम
1. Setcall – नया ट्रेनी ATCO लाइसेंस
अब ATCO ट्रेनी को ‘Setcall’ नामक लाइसेंस मिलेगा। वह केवल अनुभवी ट्रेनर की निगरानी में ही रडार या रेडियो पर काम कर सकेगा। कंट्रोल टॉवर तक तभी एंट्री, जब सभी टेस्ट क्लियर हों।
2. प्रशिक्षण संस्थान अब ऑडिट के घेरे में
अब हर एटीसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को कौशल आधारित ट्रेनिंग और क्वालिटी एश्योरेंस देना अनिवार्य होगा। उन्हें वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट भी DGCA को सौंपनी होगी।
3. लॉगबुक की अनिवार्यता
ATCO को हर महीने अपनी ट्रेनिंग और कार्य लॉगबुक भरकर सर्टिफाई करानी होगी। इसके अलावा हर तीन महीने में यूनिट स्तर पर जांच होगी।
4. डिजिटलीकरण और मॉनिटरिंग
सभी एयर ऑपरेटरों को अब डिजिटल रिकॉर्ड में ट्रेनिंग डिटेल्स अपडेट करनी होंगी। अब इंस्पेक्शन हर साल नहीं, हर तिमाही में होगा।
5. चार्टर और VIP उड़ानों का डिजिटल रिकॉर्ड
अब हर लीज एग्रीमेंट, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और स्पेशल फ्लाइट परमिशन सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए ही स्वीकार होंगे।
6. मेडिकल और VIP उड़ानों की अनुमति सिर्फ 12 घंटे में
मेडिकल इवैकुएशन, राहत और VIP मूवमेंट की फ्लाइट को अब 12 घंटे के भीतर डिजिटल पोर्टल पर अनुमति मिल जाएगी।

ATCO कौन होता है, और इनका रोल कितना संवेदनशील होता है?
एयर ट्रैफिक कंट्रोलर वह इंसान है जो हर फ्लाइट की ‘जिंदगी की डोर’ अपने हाथों में रखता है। वो तय करता है—
- कौन सा विमान कब उड़ान भरेगा?
- कितनी ऊंचाई पर उड़ान होगी?
- और कब और कैसे लैंड करेगा?
ये किसी कंप्यूटर का काम नहीं है—ये इंसान की सटीक सोच, तुरंत फैसला लेने की क्षमता और जिम्मेदारी का खेल है।
एक गलती = सैकड़ों जानों की कीमत।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश और सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी
हाल ही में हुए अहमदाबाद विमान हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने “पायलट की गलती की अटकलों” को अफसोसनाक बताया और कहा कि स्वतंत्र जांच की संभावनाएं देखी जाएं। ये बयान अपने-आप में बताता है कि केवल पायलट या मशीन की नहीं, बल्कि नियंत्रण में बैठे लोगों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है।
