Ashok Gehlot Supreme Court orders violation 2025 : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा,कि राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-यू के तहत पंचायती राज संस्थानों और नगर निकायों के चुनाव हर पांच साल में करवाना जरूरी है। हालांकि सरकार चुनाव कराए बिना प्रशासक नियुक्त कर कार्यकाल बढ़ा रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
पंचायती राज और नगर निकाय का 5 साल का कार्यकाल तय
गहलोत ने बताया कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि इन संस्थाओं का कार्यकाल किसी भी स्थिति में 5 साल से अधिक नहीं होना चाहिए। चुनाव नहीं कराना संवैधानिक अधिकारों की अवहेलना करना है जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
प्रशासकों की नियुक्ति से कामकाज ठप
गहलोत ने कहा कि अपने मनमर्जी से प्रशासक लगाने से इन संस्थाओं के कामकाज में बाधा आई है और ये संस्थान अपनी मूल भूमिका निभाने में असमर्थ हो गए हैं। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कमजोर हो रही हैं।
Ashok Gehlot Supreme Court orders violation 2025 :सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का जिक्र किया जिनमें पंचायती राज संस्थानों और नगर निकायों के हर 5 साल चुनाव कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुकर रही है।
READ MORE :राजस्थान के मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
राजनीतिक प्रभाव
गहलोत ने कहा कि पंचायत चुनावों का स्थगन उनकी सरकार के लिए भी राजनीतिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं मिल रहा, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है।
अशोक गहलोत का यह आरोप राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी की अनदेखी के खिलाफ महत्वपूर्ण चेतावनी है। पंचायती राज और नगर निकायों के सशक्त लोकतंत्र के लिए चुनाव समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए चुनाव जल्द से जल्द करवाने चाहिए।
