Ashok Gehlot Naresh Meena controversy :राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव के प्रचार का अंतिम दिन था कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को ‘मिसगाइड’ बताया। गहलोत ने कहा कि मीणा समाज के लिए समर्पित नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। यह बयान चुनावी माहौल में नई राजनीतिक बहस छेड़ गया।
कांग्रेस का अंतिम दिन का जोरदार प्रचार
अशोक गहलोत के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई बड़े नेता अंतिम दिन मीणा बाहुल्य गांवों में जनसम्पर्क और रोड शो करते नजर आए। अंता-मांगरोल में बड़े पैमाने पर जनसभा भी आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को भारी समर्थन मिला। कांग्रेस ने इस उपचुनाव को विकास और सामाजिक एकता का मुद्दा बनाकर प्रचार किया।
भाजपा का भी रहा कड़ा प्रचार
वहीं, भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन के समर्थन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रोड शो किया था। उन्होंने अपने प्रचार में केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को रेखांकित किया। भाजपा ने जातिगत समीकरण के मद्देनजर चुनावी ताकत बढ़ाने के लिए बड़े नेताओं को मैदान में उतारा।
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त्रिकोणीय मुकाबला और मतदाताओं की भूमिका
इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच है। नरेश मीणा अनुसूचित जाति और युवाओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबला और दिलचस्प बन गया है। कुल मतदाता संख्या लगभग 2.68 लाख है, जिसमें मीणा, माली, गुर्जर और धाकड़ जैसे समुदाय प्रमुख हैं।
मतदान की दिनांक
अंता विधानसभा उपचुनाव में मतदान 11 नवंबर को होगा। इसके बाद 14 नवंबर को मतगणना होगी। जनता का ध्यान अब पूरी तरह मतदान पर है जहां वे अपना फैसला देंगे कि किसे विधानसभा की सत्ता सौंपनी है।
अंतिम दिन के प्रचार में दोनों प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अशोक गहलोत जैसे बड़े नेता की टिप्पणी से चुनावी राजनीति में नया ड्रामा जुड़ा है। अब फैसले के दिन मतदाता इस राजनीतिक जंग का परिणाम तय करेंगे जो न केवल इस क्षेत्र बल्कि राजस्थान की राजनीतिक दिशा पर भी असर डालेगा।
