Ashadha Gupt Navratri 2025: हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, लेकिन गुप्त नवरात्रि की बात करें तो यह साधना, तंत्र और सिद्धि की दृष्टि से अत्यंत खास मानी जाती है। आषाढ़ मास में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूप नहीं, बल्कि दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। यह समय विशेष रूप से तांत्रिक, साधक और अघोरीों के लिए महत्वपूर्ण होता है, परंतु सामान्य श्रद्धालुओं के लिए भी यह अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
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गुप्त नवरात्रि का महत्व…
गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और देवी सिद्धि के लिए बहुत खास मानी जाती है। यह पर्व उन लोगों के लिए आदर्श समय होता है जो तांत्रिक विधियों के माध्यम से सिद्धियां प्राप्त करना चाहते हैं। माना जाता है कि इन नौ दिनों में की गई देवी साधना, मंत्र जाप, यज्ञ या तपस्या का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।
गुप्त नवरात्रि में साधक देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं की साधना करते हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. माता काली
2. तारा देवी
3. त्रिपुरा सुंदरी (षोडशी)
4. भुवनेश्वरी
5. छिन्नमस्ता
6. भैरवी
7. धूमावती
8. बगलामुखी
9. मातंगी
10. कमला देवी
इन महाविद्याओं की साधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मिक बल और समस्त बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 की तिथि…
गुप्त नवरात्रि प्रारंभ: 26 जून 2025, गुरुवार (प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से पूर्व)
प्रतिपदा तिथि का समापन: 26 जून को दोपहर 1:25 बजे
अष्टमी तिथि: 3 जुलाई 2025, गुरुवार
नवमी तिथि का समापन: 4 जुलाई को शाम 4:32 बजे
समापन तिथि: 4 जुलाई 2025
इस प्रकार, गुप्त नवरात्रि 9 दिनों तक चलेगी और देवी की साधना का सर्वोत्तम समय रहेगा।
गुप्त नवरात्रि के नियम: जिनका पालन है आवश्यक…
तामसिक भोजन से परहेज…
इस पावन अवधि में मांस, मछली, लहसुन, प्याज और मदिरा का सेवन पूर्णतः वर्जित है। यह शुद्ध सात्विकता का समय होता है, इसलिए मन, वचन और आहार सभी को पवित्र रखना अनिवार्य है।
बाल और नाखून न काटें…
नवरात्रि के दौरान बाल काटना, शेविंग करना या नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इससे पूजा की शुद्धता भंग होती है।
बिस्तर पर सोना मना है..
विशेषकर जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोना चाहिए। दिन के समय सोना भी वर्जित होता है।
चमड़े की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें…
गुप्त नवरात्रि के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग या धारण करना वर्जित है। यह अपवित्र सामग्री मानी जाती है और साधना में विघ्न डालती है।
क्रोध और कलह से बचें…
इन नौ दिनों में व्रती को क्रोध, अपशब्द, झूठ और निंदा से बचना चाहिए। यह साधना और व्रत की ऊर्जा को नकारात्मक बना सकता है।
कैसे करें पूजा और साधना?
गुप्त नवरात्रि में आम श्रद्धालु माता दुर्गा की आरती, दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, चालीसा आदि का पाठ कर सकते हैं। साधक विशेष रूप से तंत्र-साधनाएं, जप और हवन करते हैं। किसी योग्य गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करके महाविद्याओं की साधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
