आसाराम फिर सलाखों के बाहर
Asaram’s interim bail extended:गुजरात हाईकोर्ट ने 7 अगस्त को आसाराम की अंतरिम जमानत की अवधि 21 अगस्त तक बढ़ा दी है। 2013 में हुए बलात्कार के एक मामले में गांधीनगर सेशन कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया था। वर्तमान में आसाराम बापू आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। इससे पहले भी 3 जुलाई को एक महीने के लिए जमानत मिल चुकी है ।
स्वास्थ्य कारणों की वजह से मिले अंतरिम जमानत
हाल ही में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर अस्थायी ज़मानत मिली थी। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह उनकी अंतिम राहत होगी और इसके बाद उन्हें जेल वापस जाना होगा। हालांकि, अदालत ने एक बार फिर उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ज़मानत की अवधि बढ़ा दी है।

सशर्त मिलेगी जमानत
गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस पी.एम. रावल शामिल हैं, ने आसाराम की अंतरिम ज़मानत को बढ़ाने का निर्णय सुनाया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का ज़िक्र भी किया। जिसमें यह स्पष्ट हो कि जब सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू को इलाज के लिए अस्थायी ज़मानत प्रदान की थी, तो इसके साथ कई शर्तें भी लगाई थीं।
अनुयायियों से मिलने, व प्रवचन करने पर रोक रहेगी
इनमें प्रमुख रूप से यह निर्देश शामिल था कि वे ज़मानत की अवधि में..
- अपने अनुयायियों और
- समर्थकों से संपर्क नहीं करेंगे और किसी प्रकार का प्रवचन भी नहीं देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि याचिकाकर्ता की तबीयत बिगड़ती है, तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा था आगे से जमानत नहीं देंगे
पिछली जमानत के दौरान आसाराम के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि वे आगे जमानत बढ़ाने की कोई मांग नहीं करेंगे। इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने भी स्पष्ट कह दिया था कि भविष्य में मेडिकल कारणों से जमानत की अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी। इन सबके बावजूद आसाराम बापू ने फिर से जमानत बढ़ाने की अर्जी लगाई है।

सुप्रिम कोर्ट दखल देने से कर चुका है इंकार
Asaram’s interim bail extended:सुनवाई के दौरान जस्टिस ईलेश जे. वोरा और जस्टिस पीएम रावल ने सुप्रीम कोर्ट के 30 जुलाई के आदेश का हवाला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 3 जुलाई के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया था, लेकिन कहा था कि अगर आसाराम की तबीयत और बिगड़ती है, तो वे हाईकोर्ट में दोबारा आवेदन कर सकते हैं और हाईकोर्ट से उस पर जल्द सुनवाई की अपेक्षा की जाएगी।
