जमीन हिल गई, तब जाकर हुआ CBI का एक्शन
कभी-कभी जो बातें हमारी ज़िन्दगी में छुपी रहती हैं, वे अचानक उजागर हो जाती हैं। पिछले कई दिनों से अनिल अंबानी के खिलाफ छाये काले बादल कुछ और ज्यादा ही गहरा होते दिखाई दे रहे थे और अब, CBI ने उसी अँधेरे में सीधी टॉर्च जलाई है। 23 अगस्त की सुबह कुछ ऐसा ही हुआ, जब CBI ने Reliance Communications (RCom) और अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और FIR दर्ज की एक बैंक फ्रॉड मामले में जिसकी राशि ₹2,000 करोड़ से ऊपर है.
SBI ने किया ‘रिस्क ज़ोन’ में शिफ्ट
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि SBI ने RCom और अनिल अंबानी को “फ्रॉड” घोषित कर दिया है, और इसके लिए उसने CBI में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक ज्ञात हुआ कि SBI का exposure ₹2,227.64 करोड़ (fund-based principal) और ₹786.52 करोड़ (non-fund-based bank guarantees) शामिल हैं, जो साल 2016 से accumulate हो रहा है।
ED की पहले ही कर चुके थी रेड
याद कीजिए 23 जुलाई को ED ने अनिल अंबानी से जुड़े 35‑50 ठिकानों पर छापे मारे थे, जो Yes Bank से जुड़े ₹3,000 करोड़ के लोन फ्रॉड में थे। ED की शुरुआती जांच में सामने आया कि loans shell companies को divert किए गए, दस्तावेज अधूरे थे, और Yes Bank अधिकारियों में कथित रिश्वत की जांच चल रही थी।
CBI ने लगाया FIR और कि ठिकानों पर छापेमारी
आख़िरकार, CBI ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए रिमोटैरी रेड का दायरा बढ़ा दिया। RCom और अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई, मामला दर्ज किया गया, और अब एक व्यापक जांच शुरू हो गई है।
भावनात्मक रंग देकर समझिए ज़िंदगी कैसे बदलती है ‘रेड’ से
कल्पना करें सुबह की हल्की धूप, पर घर के बाहर CBI की बेल्ट पहने अधिकारी, कैमरे, कैमरे की फ्लैश हर घर का उस लम्हे में कोई अपना भी नहीं लगता। जहां कल तक रुतबा था, वहाँ अब सवालों की बौछार हो। यही होता है उस पल जब इंसानी ज़िन्दगी में ‘असत्य’ की गूँज घर से निकलकर कानूनी गलियारों तक पहुँच जाती है।
जैसे एक नौजवान जो अपनी मेहनत से कुछ बनना चाहता था, पर अचानक मुकदमे और रेड में गिर जाता है कैसा उलझन भरा, डरावना एहसास होगा। यही कहानी आज का corporate दुनिया में unfold हो रही है।
ये अंतिम अध्याय नहीं, बस जांच की शुरुआत है
यह मामला सिर्फ CBI की रेड नहीं यह एक बड़े प्रश्न का जवाब है: क्या आर्थिक पारदर्शिता, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही बची है? RCom और अनिल अंबानी के लिए यह सफ़र अब विस्तार से जाँचा जाएगा कानूनी, नैतिक, और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर। कोर्ट, एजेंसियाँ, और अंततः जनता सभी की आंखें इस मामले पर लगी हैं। आने वाले दिनों में हमें और बयान, दस्तावेज़, और संभवतः कार्रवाई देखने को मिलेगी।
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