Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले स्थित प्रसिद्ध कासीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में शनिवार को एकादशी के अवसर पर मची भगदड़ में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ होने के कारण रेलिंग टूटने से यह हादसा हुआ।

घायलों को तत्काल पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि प्रशासन ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं बताई जा रही हैं।
बालाजी या गोविंदा नामों से भी पुकारते लोग

कासीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर, श्रीकाकुलम जिले का एक प्राचीन और श्रद्धेय तीर्थ स्थल है। इसे “उत्तरा तिरुपति” यानी उत्तर भारत का तिरुपति भी कहा जाता है, क्योंकि यहां की मूर्ति, स्थापत्य शैली और पूजा-पद्धति तिरुपति बालाजी मंदिर से काफी मेल खाती है।
इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर (श्री विष्णु) की पूजा की जाती है, जिन्हें स्थानीय लोग श्रीनिवास, बालाजी या गोविंदा नामों से भी पुकारते हैं।
Andhra Pradesh: दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक माना जाता

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 11वीं–12वीं शताब्दी में चोल और चालुक्य शासकों के शासनकाल के दौरान निर्मित हुआ था। इसके वास्तुशिल्प और धार्मिक महत्व के कारण यह दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक माना जाता है।
हर वर्ष यहां एकादशी, कार्तिक मास और अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन अवसरों पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भोग, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है

भक्तों का विश्वास है कि भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
शनिवार को एकादशी पर भी बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे थे। भीड़ अचानक बढ़ने से व्यवस्था बिगड़ गई और रेलिंग टूटने के बाद भगदड़ मच गई। प्रशासन और पुलिस ने तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किया तथा घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा।
घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा
Andhra Pradesh: यह हादसा मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारी अब यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र यह प्राचीन मंदिर फिर किसी त्रासदी का साक्षी न बने।
