Amreli district roads: अमरेली जिले के राजुला-सावरकुंडला राष्ट्रीय राजमार्ग और राजुला बाईपास रोड पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि सड़क पर गड्ढों की वजह से गाड़ियाँ डगमगाती हैं, जिससे उन्हें डर और असुविधा होती है। गुजरात में मानसून के बाद राज्य सरकार ने सड़क और भवन विभाग को गड्ढे भरने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन अमरेली जिले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

Amreli district roads: इन गड्ढों को जल्द से जल्द भरा जाए
राजुला-सावरकुंडला राजमार्ग पर ही 50 से अधिक गड्ढे हैं, जिनसे रोजाना सफर करने वाले लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय दूध विक्रेताओं ने बताया कि गड्ढों के कारण वाहन उछलते हैं, जिससे दूध सड़क पर बह जाता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि इन गड्ढों को जल्द से जल्द भरा जाए।
गड्ढों को सही ढंग से भरने की मांग की है
राजुला-सावरकुंडला और सावरकुंडला-अमरेली राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत भी बेहद खराब है। जिले की मुख्य सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें भी इसी तरह क्षतिग्रस्त हैं। राजुला बाईपास पर भी बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई देते हैं। बाइक सवारों का कहना है कि अगर तुरंत मरम्मत नहीं हुई, तो हादसों की आशंका और बढ़ जाएगी। यात्रियों ने सड़क की स्थिति पर आक्रोश जताया और वाहन चालकों ने एक सुर में गड्ढों को सही ढंग से भरने की मांग की है।
Amreli district roads: अधिकारी कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं
इधर, मानसून की पहली बारिश ने हालात और खराब कर दिए हैं, लेकिन पथ निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी इस विषय पर बोलने से बच रहे हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार के निर्देशों के बाद अमरेली जिले के अधिकारी कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
Amreli district roads: भाजपा का पूर्ण बहुमत है, तो विकास कार्य कहां
सिर्फ हाईवे ही नहीं, राजुला शहर की मुख्य सड़कों की स्थिति भी दयनीय है। राजुला महुवा रोड से कोटेश्वर महादेव मंदिर तक की सड़क पर भी गड्ढों की भरमार है। शहर के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं कि जब नगरपालिका में भाजपा का पूर्ण बहुमत है, तो विकास कार्य कहां हैं?
समस्याओं का समाधान कब होगा?
चुनाव के वक्त जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन फिलहाल राजुला के लोग बदहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। मानसून शुरू हो चुका है और दोनों बांध भी भर चुके हैं, जबकि राजुला में चार से पांच दिन में एक बार ही पानी आपूर्ति हो रही है। ऐसे में नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर उनका प्रतिनिधित्व कौन करेगा और समस्याओं का समाधान कब होगा?
