Uttarakhand Heavy Rainfall: उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में तबाही मचाई है। भूस्खलन और बाढ़ के कारण प्रमुख राजमार्ग बंद हो गए हैं, और गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, और अन्य क्षेत्रों में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और मलबे के कारण यातायात बाधित है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
भूस्खलन से बंद हुए प्रमुख राजमार्ग
लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कई प्रमुख राजमार्ग भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। रुद्रप्रयाग में बद्रीनाथ हाईवे भूस्खलन के कारण पूरी तरह बंद है। उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे धरासू पुराना थाना और सोनागढ़ के पास मलबे से अवरुद्ध है। यमुनोत्री हाईवे भी नारदचट्टी के पास बंद हो गया है। हालांकि, कुथनौर में यातायात बहाल हो गया है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में मलबा हटाने का काम तेजी से जारी है। इसके अलावा, 163 सड़कें, जिनमें पांच राष्ट्रीय राजमार्ग और सात राज्य राजमार्ग शामिल हैं, पूरे राज्य में बंद हैं, जिससे बचाव कार्य और आपूर्ति वितरण में बाधा उत्पन्न हो रही है।
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Uttarakhand Heavy Rainfall: गंगा का जलस्तर बढ़ा
लगातार बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरिद्वार में गंगा 93.15 मीटर पर बह रही है, जो चेतावनी स्तर से 15 सेंटीमीटर ऊपर है, जबकि खतरे का निशान 94 मीटर है। प्रशासन ने गंगा के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि जलस्तर में और वृद्धि होने पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, और स्थानीय लोगों को नदी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। उत्तरकाशी में खीर गंगा नदी के ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने से धराली गांव में भारी तबाही हुई, जिसमें कई घर, दुकानें और होटल बह गए।
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गंगा का जलस्तर बढ़ा[/caption]
बारिश और नुकसान का दायरा
उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई है, विशेष रूप से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, और टिहरी में। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 10 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी, जिसके बाद से स्थिति और गंभीर हो गई। उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में बादल फटने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, और 50 से अधिक लोग लापता हैं। लगभग 40-50 इमारतें, जिनमें होटल और घर शामिल हैं, पूरी तरह नष्ट हो गए। इसके अलावा, 316 लोगों की जान भूस्खलन और बाढ़ में गई है, और पिछले दस वर्षों में 3,500 से अधिक लोग प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए हैं।
राहत और बचाव कार्य
Uttarakhand Heavy Rainfall: प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। भारतीय सेना, NDRF, SDRF, ITBP, और BRO की टीमें धराली और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य में जुटी हैं। उत्तरकाशी में बैली ब्रिज का निर्माण किया गया है, और हेलीकॉप्टरों के जरिए 190 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की समीक्षा की और केंद्र सरकार से सहायता मांगी है।
देवम मेहता की रिपोर्ट