आदि कैलाश यात्रा का शुभारंभ, शिव-पार्वती मंदिर के कपाट खुले
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित शिव-पार्वती मंदिर के कपाट आज विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। इसके साथ ही आदि कैलाश यात्रा का शुभारंभ हो गया है। लंबे इंतजार के बाद कपाट खुलते ही व्यास घाटी में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है।
SDM ने यात्रा को दिखाई हरी झंड़ी
धारचूला से प्रशासन की निगरानी में यात्रा की शुरुआत हुई। SDM आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 यात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। यह जत्था करीब 140 km का सफर तय कर आदि कैलाश पहुंचेगा, जहां श्रद्धालु पार्वती सरोवर और आदि कैलाश के दर्शन किए जाएंगे। शिवभक्तों ने “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ यात्रा की शुरूआत की। शासन की ओर से सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात से जुड़ी सभी जरूरी व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित की गई हैं ताकि श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा कर सकें। 2025 में करीब 35000 श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शन किए थे।
यात्रियों से लौटी रौनक
यात्रा शुरू होते ही धारचूला, गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग तक गतिविधियां तेज हो गई। टूर ऑपरेटर, होटल व्यवसायी और होमस्टे संचालकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सीमांत गांवों में जहां पहले सन्नाटा था, वहां अब यात्रियों की आवाजाही से रौनक लौट आई। स्थानीय लोग इस यात्रा को अपनी आजीविका से जोड़ रहे हैं और बेहतर सीजन की उम्मीद कर रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं अलर्ट पर
आदि कैलाश यात्रा 3,000 से 5,500 m की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा होता है। प्रशासन ने यात्रियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। हेलीकॉप्टर सेवाओं और बढ़ती पर्यटक संख्या के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई, खासकर कचरा प्रबंधन और ग्लेशियर इलाकों में मानवीय गतिविधियों को लेकर।