उत्तराखंड

मसूरी में भट्टा गांव रोपवे पर मॉक ड्रिल: आपदा प्रबंधन का अनोखा प्रदर्शन

Mock Drill Bhattagaon Ropeway Mussoorie: मसूरी के भट्टा गांव रोपवे पर एक रोमांचक और शिक्षाप्रद दृश्य देखने को मिला। यह रोपवे, जो आमतौर पर पर्यटकों की भीड़ से गुलज़ार रहता है, इस दिन सायरनों की आवाज़ और सुरक्षा बलों की फुर्ती से जीवंत हो उठा। हालांकि, यह कोई वास्तविक हादसा नहीं था, बल्कि एक पूर्व नियोजित मॉक ड्रिल थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अगर रोपवे में तकनीकी खराबी के कारण पर्यटक हवा में फंस जाएं, तो उन्हें मिनटों में सुरक्षित निकाला जा सके। इस अभ्यास ने न केवल आपदा प्रबंधन की ताकत को प्रदर्शित किया, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों में विश्वास भी जगाया।

[caption id="attachment_104561" align="alignnone" width="649"] मसूरी में भट्टा गांव रोपवे पर मॉक ड्रिल[/caption]

मॉक ड्रिल का आयोजन 

इस मॉक ड्रिल में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सिविल पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें शामिल थीं। अभ्यास का परिदृश्य यह था कि रोपवे अचानक बंद हो गया है और कई केबिन हवा में अटक गए हैं, जिनमें यात्री फंसे हुए हैं। टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ एसडीएम मसूरी, आईएएस राहुल आनंद के नेतृत्व में मौके पर पहुंचीं। स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद, करीब एक घंटे तक चले ‘रोप रेस्क्यू टेक्निक’ के जरिए यात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित नीचे उतारा गया। [caption id="attachment_104563" align="alignnone" width="551"] आईएएस राहुल आनंद, एसडीएम[/caption]

रोप रेस्क्यू तकनीक का उपयोग

मॉक ड्रिल में रोप रेस्क्यू तकनीक का उपयोग किया गया, जो आपदा प्रबंधन में एक जटिल और विशेष कौशल है। इस तकनीक के तहत, प्रशिक्षित कर्मी रस्सियों और विशेष उपकरणों का उपयोग करके फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाते हैं। इस अभ्यास ने न केवल तकनीकी दक्षता को परखा, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और समन्वय की क्षमता को भी जांचा। उपकरणों और संसाधनों की वास्तविक समय में टेस्टिंग भी इस ड्रिल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। [caption id="attachment_104562" align="alignnone" width="570"] रोप रेस्क्यू तकनीक का उपयोग[/caption]

Mock Drill Bhattagaon Ropeway Mussoorie: मॉक ड्रिल का उद्देश्य

एसडीएम मसूरी राहुल आनंद, एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर राजन सिंह और आईटीबीपी के एसआई रमेश कुमार ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। इसके अलावा, यह विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता को परखने और उपकरणों की कार्यक्षमता को जांचने का अवसर भी था। मसूरी जैसे पर्यटन स्थल पर, जहां हर साल लाखों लोग आते हैं, रोपवे जैसे हाई-टेक सिस्टम में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में, इस तरह के अभ्यास आपात स्थिति के लिए तैयार रहने में मदद करते हैं।

उत्तराखंड में रोपवे की बढ़ती अहमियत

Mock Drill Bhattagaon Ropeway Mussoorie: उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में रोपवे न केवल पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण हैं, बल्कि स्थानीय परिवहन का भी एक महत्वपूर्ण साधन बनते जा रहे हैं। बीते वर्षों में, भारत के कई राज्यों में रोपवे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लंबे और जटिल ऑपरेशन चलाने पड़े हैं। ऐसे में, समय-समय पर इस तरह के मॉक ड्रिल आयोजित करना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करता है, बल्कि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की गारंटी भी देता है।