उत्तराखंड के जोशीमठ में भूस्खलन से खतरा जारी है। व

जोशीमठ में खतरा टला नहीं, भूस्खलन जारी, विस्थापन और मॉनिटरिंग में देरी

जोशीमठ में घरों में आई दरारों ने

2023 में उत्तराखंड के जोशीमठ में घरों में आई दरारों ने देशभर को हिला दिया था, लेकिन 3 साल बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां भूस्खलन अब भी जारी है और मानसून में हालात फिर बिगड़ सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि 100 करोड़ स्वीकृत होने के बावजूद प्रभावित लोगों का विस्थापन अब तक पूरा नहीं हो सका।

भूस्खलन पूरी तरह नहीं रुका 

जोशीमठ की जांच करने वाली संस्थाओं में शामिल वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि क्षेत्र में भूस्खलन पूरी तरह रुका नहीं है। जमीन के अंदर हलचल जारी है, जो फिलहाल दिखाई नहीं देती, लेकिन मानसून के दौरान इसकी स्पीड तेज हो सकती है और स्थिति अचानक गंभीर बन सकती है।

मॉनिटरिंग सिस्टम

2023 में सर्वे के बाद वैज्ञानिकों ने कई सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर काम नहीं हो पाया। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल खतरे वाले इलाके को चिन्हित करना काफी नहीं है, बल्कि लगातार मॉनिटरिंग सिस्टम और अलर्ट मैकेनिज्म विकसित करना जरूरी है ताकि वक्त रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

मजबूत ड्रेनेज सिस्टम जरूरी

वैज्ञानिकों ने कहा है कि संवेदनशील इलाकों में विकास कार्य वहां की क्षमता के अनुसार ही होने चाहिए। बिना किसी पूर्व योजना के निर्माण और बढ़ती आबादी खतरे को बढ़ा सकती है। साथ ही मजबूत ड्रेनेज सिस्टम जरूरी है, क्योंकि जल निकासी की खराब व्यवस्था जमीन की स्थिरता को प्रभावित करती है।