उत्तराखंड
लिव-इन की बात माता-पिता को नहीं बताएगी सरकार, UCC में लिव-इन नियमों में बड़ा बदलाव
Live-in UCC rules: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) 2025 में संशोधन के लिए बड़ा प्रस्ताव नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल किया है। इस प्रस्ताव का मकसद लिव-इन रिलेशनशिप में नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता को मजबूत करना बताया गया है। राज्य सरकार ने कहा है कि नए नियमों से लिव-इन पार्टनर की गतिविधियों पर कोई अनावश्यक निगरानी नहीं होगी और सरकारी हस्तक्षेप सीमित होगा।
इस बदलाव को लेकर सरकार ने कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर कहा कि यह नागरिकों के “प्राइवेसी और फ्रीडम” के अधिकारों की रक्षा करेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नए नियम क्या बदलेंगे
उत्तराखंड सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई पुराने नियम अब समाप्त या संशोधित किए जा रहे हैं।- माता-पिता को जानकारी देने की बाध्यता खत्म
- गर्भधारण और रिश्ते खत्म होने की सूचना की अनिवार्यता हटेगी
- पुलिस जांच और निगरानी पर रोक
- विवाह पंजीकरण में आसान नियम
- धर्म या सामुदायिक प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी।
- विवाह पंजीकरण के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य नहीं होगा। इस बदलाव से विवाह पंजीकरण प्रक्रिया अधिक इनक्लूसिव और आसान बन जाएगी।
Live-in UCC rules: UCC क्या है और क्यों जरूरी है?
UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य भारत में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है। वर्तमान में विवाह, तलाक, संतान और उत्तराधिकार जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के अनुसार कानून लागू होते हैं। उत्तराखंड सरकार ने कहा कि UCC से नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और धार्मिक या सामाजिक भेदभाव खत्म होगा। UCC के अंतर्गत लिव-इन रिलेशन, विवाह पंजीकरण, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर समान नियम होंगे, जिससे नागरिकों की स्वतंत्रता और प्राइवेसी सुनिश्चित होगी।क्यों किया जा रहा बदलाव?
- नागरिकों की प्राइवेसी की रक्षा: नए नियम सुनिश्चित करेंगे कि 21 साल से कम उम्र वाले युवा भी निजी जीवन में सरकारी या सामाजिक हस्तक्षेप से सुरक्षित रहें।
- निजी निर्णयों में स्वतंत्रता: लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर अपनी जिंदगी के फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकेंगे।
- सरकारी प्रक्रिया में सरलता: विवाह पंजीकरण और लिव-इन रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं में धार्मिक या सामुदायिक प्रमाणपत्र की बाध्यता हटाई जाएगी, जिससे लोगों को सरकारी कामकाज में सुविधा होगी।
- सुरक्षा और कानूनी संरक्षण: केवल कानूनी शिकायत मिलने पर ही कोई कार्रवाई होगी। यह नागरिकों की अवांछित निगरानी और तंग करने की प्रवृत्ति को खत्म करता है।