उत्तराखंड
इस तिथि को होंगे चार धाम के कपाट बंद, जानें पूरी जानकारी
Char Dham closing dates 2025: उत्तराखंड में स्थित चार धाम — बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री — हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल माने जाते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन पवित्र धामों के दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन शीत ऋतु के आगमन के साथ ही इन धामों के कपाट कुछ महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस बार भी चार धाम यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर है और सभी धामों के कपाट बंद करने की तिथियां घोषित की जा चुकी हैं।
बदरीनाथ धाम के कपाट कब बंद होंगे?
बदरीनाथ धाम को चार धामों में सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम धाम माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह धाम समुद्र तल से लगभग 10,279 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शीत ऋतु में यहां भारी बर्फबारी होती है, इसलिए कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर 2025 को बंद किए जाएंगे। हर साल विजयादशमी के बाद दीपावली और भैया दूज पर शुभ मुहूर्त देखकर कपाट बंद करने की तिथि तय की जाती है।केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि
भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ धाम भी ऊंचाई पर स्थित है और बर्फबारी की वजह से यहां रहना संभव नहीं होता। इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 15 नवंबर 2025 को बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान की जाती है।Char Dham closing dates 2025: गंगोत्री धाम
गंगा मैया के उद्गम स्थल गंगोत्री धाम में कपाट बंद करने की परंपरा हर साल गोवर्धन पूजा (दीपावली के अगले दिन) पर होती है। इस बार गंगोत्री धाम के कपाट 13 नवंबर 2025 को बंद होंगे।यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि
यमुनोत्री धाम में मां यमुना की पूजा होती है। यह धाम भी शीत ऋतु में पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है। इस बार यमुनोत्री धाम के कपाट 14 नवंबर 2025 को बंद किए जाएंगे।क्यों बंद हो जाते हैं कपाट?
चार धाम हिमालय की ऊंची चोटियों पर बसे हैं। शीत ऋतु के दौरान यहां का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और भारी बर्फबारी होती है। ऐसे में श्रद्धालुओं का पहुंचना और रहना असंभव हो जाता है। इसलिए परंपरागत रूप से हर साल धामों के कपाट सर्दियों से पहले बंद कर दिए जाते हैं।Char Dham closing dates 2025: धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि जब कपाट बंद हो जाते हैं तो देवताओं की मूर्तियों को शीतकालीन गद्दी स्थलों पर विराजमान किया जाता है। उदाहरण के तौर पर —- बाबा केदार की डोली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में लाकर स्थापित की जाती है।
- गंगा माता की पूजा गंगोत्री से हर्षिल और मुखबा गांव में की जाती है।
- मां यमुना की पूजा शीतकाल में खरसाली गांव में होती है।
- बदरीनाथ धाम के भगवान नारायण जोशीमठ में नरसिंह मंदिर में विराजते हैं।