उत्तर प्रदेश

UP CM YOGI: जाति और धर्म की बिसात पर मिशन 2027 की सियासी चालें

UP CM YOGI: उत्तर प्रदेश की सियासत में जाति और धर्म की बिसात पर चालें तेज हो गई हैं। मिशन 2027 की तैयारियों के तहत भाजपा और सपा दोनों अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। भाजपा जहां अलग-अलग हिंदू जातियों को उनके महापुरुषों के जरिये जोड़ने का प्रयास कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग को एकजुट कर सत्ता में वापसी का रास्ता तलाश रही है।

[caption id="attachment_85348" align="alignnone" width="235"] cm yogi adityanath[/caption]

UP CM YOGI: भाजपा के जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका निभा रहे

भाजपा की रणनीति की शुरुआत 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ में की थी, जब जाट समाज के नायक राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई। इसका लाभ पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में मिला। इसके बाद भाजपा ने छत्रपति शिवाजी की जयंती मनाकर आगरा में हिंदू गौरव को प्रमुखता दी। इसी क्रम में राणा सांगा को लेकर आगरा में क्षत्रिय सम्मेलन हुआ, जिसमें पर्दे के पीछे भाजपा के जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

UP CM YOGI: क्षेत्र की सियासत में बड़ी भूमिका निभाते

अब पाल-बघेल और धनगर समाज को जोड़ने के लिए अहिल्याबाई होल्कर को आगे किया गया है। आगरा और अलीगढ़ मंडल में इन जातियों की संख्या 6-7 लाख के बीच है। अकेले आगरा की 9 विधानसभा सीटों पर इनका असर निर्णायक माना जा रहा है। साथ ही, जाट और क्षत्रिय समाज भी क्षेत्र की सियासत में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

UP CM YOGI: बिखराव रोकने की रणनीति अपना रही

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को यूपी में झटका लगा, जहां सपा ने 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी। इसके जवाब में भाजपा अब धार्मिक प्रतीकों और महापुरुषों के सहारे जातियों में बिखराव रोकने की रणनीति अपना रही है।

2027 की बिसात बिछा चुके

आगामी पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव का ट्रेलर मानते हुए दोनों दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। एक ओर सपा सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पीडीए कार्ड खेल रही है, तो दूसरी ओर भाजपा धार्मिक भावनाओं और इतिहास की विरासत से जातीय समीकरण साधने की कोशिश में लगी है। महापुरुषों के नाम पर सियासी मोहरे चलकर दोनों दल 2027 की बिसात बिछा चुके हैं।