समाजवादी पार्टी ने I-PAC से अपना समझौता समाप्त किया
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद समाजवादी पार्टी ने बड़ा कदम उठाया। चुनाव परिणाम आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) से समझौता खत्म कर दिया। ये घटनाक्रम ऐसे वक्त के बाद सामने आया है, जब बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ED ने कोलकाता स्थिति 'I-PAC' के कार्यालय में छापेमारी की थी। इस छापेमारी की वजह से फर्म कामकाज प्रभावित हुआ।
कानूनी पचड़े में फंसी I-PAK
कानूनी पचड़े में फंसी I-PAC के सूत्रों ने बताया कि सपा से इस साल की शुरुआत में तय हुआ समझौता अब रद्द हो चुका है। समाजवादी पार्टी का 2027 के UP विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के साथ समझौता हुआ था। सूत्रों के अनुसार, कानूनी झमेले में उलझी I-PAC की चुनावी असफलताओं और सपा की आंतरिक आपत्तियों के कारण समझौता रद्द हुआ है।
ED की छापेमारी
इसके अलावा फर्म की कम सक्रियता के कारण TMC और I-PAC के बीच दूरियां बढ़ गईं। I-PAC के कई सूत्रों ने पुष्टि की कि ED छापेमारी के बाद TMC नेताओं के साथ उनके संबंध खराब हो गए। सूत्र ने बताया कि नेताओं को चुनाव से पहले पूरी मदद की उम्मीद थी, लेकिन धरातल पर हमारी कम सक्रियता ने उन्हें नाराज कर दिया। कानूनी पचड़े की वजह से I-PAC का कार्य प्रभावित हुआ है। कंपनी ने UP में अपना कार्यालय बंद कर दिया और लगभग 30-40 नियुक्त लोगों को काम पर न आने के लिए कहा गया है। इससे सपा की चुनाव प्रचार तैयारियां ठप होने का संकेत मिला। वहीं, I-PAC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि कई कारकों ने इस समझौते के टूटने में भूमिका निभाई है। ममता बनर्जी द्वारा संसद में समझौता करवाने में I-PAC की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, लेकिन UP परियोजना के लिए चुने जा रहे चंदेल की ED ने गिरफ्तारी ने योजना को खतरे में डाल दिया।