उत्तर प्रदेश

प्रतीक यादव रंगदारी मामला: लखनऊ में पूर्व सीएम के भाई के साथ धोखाधड़ी

अखिलेश यादव के भाई प्रतीक से मांगी गई 4 करोड़ की रंगदारी, पॉक्सो एक्ट में फंसाने की दी धमकी

[caption id="attachment_95176" align="alignnone" width="256"] प्रतीक यादव रंगदारी मामला[/caption]

राजनीतिक परिवार का नाम लेकर ब्लैकमेलिंग की साजिश

प्रतीक यादव रंगदारी मामला: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव के साथ ऐसा धोखा हुआ, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।

पुराने भरोसे को बना लिया जाल, दोस्त ने ही किया धोखा

मामला सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि एक गंभीर साजिश का है। प्रतीक यादव का कहना है कि वर्ष 2011-12 में उनकी मुलाकात एक रियल एस्टेट कारोबारी कृष्णानंद पांडेय से हुई थी। कई मुलाकातों के बाद भरोसा बना और उन्होंने उसे निवेश का मौका दिया। प्रतीक ने बिजनेस में निवेश किया और निजी रूप से भी आर्थिक मदद दी।

प्रतीक यादव रंगदारी मामला: बीमारी और परिवारिक संकट का उठाया फायदा

साल 2020 में प्रतीक कोविड से पीड़ित हुए और फिर 2022 में उनकी मां, पिता और मामा का निधन हो गया। वो इस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से जूझ ही रहे थे, तभी कृष्णानंद पांडेय ने भावनात्मक तरीके से और पैसे ऐंठने शुरू कर दिए। इसके पीछे उसकी पत्नी वंदना और पिता अशोक पांडेय भी शामिल थे।

धमकियों का सिलसिला – पॉक्सो एक्ट और फेक ऑडियो वायरल करने की चेतावनी

प्रतीक यादव रंगदारी मामला: प्रतीक यादव ने जब पैसों का हिसाब मांगा, तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं। वॉट्सऐप और ईमेल के जरिए न सिर्फ पॉक्सो जैसे गंभीर कानून में फंसाने की धमकी दी गई, बल्कि एक फर्जी ऑडियो क्लिप वायरल करने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया गया। यही नहीं, इन लोगों ने 4 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग भी कर डाली।

FIR दर्ज, पुलिस की तफ्तीश शुरू

गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है। इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने बताया कि आरोपियों से जल्द पूछताछ की जाएगी और मामले की गहराई से जांच होगी।

Read More: UP के तीन आईपीएस अफसर: 3 से 6 साल से सस्पेंड, बहाली या VRS पर उठे सवाल