Dr. Shyama Prasad Mukherjee Anniversary: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती श्रद्धा, गौरव और प्रेरणा के भावों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के सिविल अस्पताल पहुंचकर डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। यह आयोजन न केवल उनकी स्मृति को समर्पित था, बल्कि उनके विचारों और भारत की अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास भी था।
125वीं जयंती स्मृति वर्ष का शुभारंभ
उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती को विशेष रूप से मनाने के लिए दो वर्षीय आयोजनों की शृंखला शुरू की है। 6 जुलाई 2025 से 6 जुलाई 2027 तक चलने वाले इस '125वीं जयंती स्मृति वर्ष' का शुभारंभ रविवार को लखनऊ में किया गया। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि[/caption]
Dr. Shyama Prasad Mukherjee Anniversary: सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिविल अस्पताल में आयोजित समारोह में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों और भारत की एकता व अखंडता के लिए उनके बलिदान की चर्चा की। सीएम ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, और उनकी जयंती के अवसर पर शुरू किए गए ये आयोजन नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस मौके पर उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यक्रमों को भव्य और प्रभावी ढंग से आयोजित किया जाए।
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सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि[/caption]
दो वर्षीय आयोजनों का महत्व
'125वीं जयंती स्मृति वर्ष' के तहत उत्तर प्रदेश में अगले दो वर्षों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें संगोष्ठियां, व्याख्यान, प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे, जो डॉ. मुखर्जी के जीवन और उनके द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ के योगदान को उजागर करेंगे। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके विचारों, विशेष रूप से 'एक देश, एक विधान, एक निशान' के सिद्धांत से परिचित कराना है। इसके अतिरिक्त, स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र-छात्राएं उनके बलिदान और देशभक्ति से प्रेरणा ले सकें।
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