उत्तर प्रदेश
Kanpur Turtle Pond: प्राचीन कछुआ तालाब अव्यवस्थाओं की भेंट, नगर निगम पर महंत के गंभीर आरोप
Kanpur Turtle Pond: कानपुर के पनकी क्षेत्र में स्थित प्राचीन कछुआ तालाब, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए जाना जाता है, आज अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया है। यह तालाब विशालकाय कछुओं और मछलियों का निवास स्थान है।
मान्यता है कि यहां कछुओं को भोजन कराने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कुछ समय पहले तक यह स्थल दर्शनार्थियों के आकर्षण का केंद्र था, लेकिन अब रखरखाव के अभाव में इसकी हालत बद से बदतर हो चुकी है। मंदिर के महंत और स्थानीय लोगों ने नगर निगम पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि नगर आयुक्त ने जल्द सुधार का वादा किया है।
नगर आयुक्त सुधीर कुमार[/caption]
जीर्णोद्धार के बाद बिगड़ी स्थिति
मई 2022 में, नगर निगम ने 70 लाख रुपये की लागत से कछुआ तालाब का जीर्णोद्धार कराया था। इस दौरान तालाब के बीच में कछुओं के प्रजनन के लिए बालू और मिट्टी का एक टापू बनाया गया। चारों ओर पक्का घाट, सुंदरीकरण के लिए लाइट्स, और बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क जैसी सुविधाएं जोड़ी गईं। शुरुआती दिनों में तालाब की स्थिति बेहतर रही, और दर्शनार्थियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। लेकिन पिछले एक साल से रखरखाव की कमी के कारण सबकुछ बर्बाद हो गया। मोटर पंप खराब, लाइट्स बंद, चिल्ड्रन पार्क उजड़ा, और तालाब की सफाई न होने से यह स्थल बदहाल हो चुका है।Kanpur Turtle Pond: महंत के आरोप
मंदिर के महंत शिवदयाल पाठक ने नगर निगम की लापरवाही को इस स्थिति का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से नगर निगम ने तालाब के रखरखाव के लिए नियुक्त माली को हटा दिया है। सुंदरीकरण के लिए लगाई गई लाइट्स बंद पड़ी हैं, और बच्चों के लिए बनाए गए झूले उखड़ चुके हैं। महंत ने कहा -हमने कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले, कोई कार्रवाई नहीं हुई।इस लापरवाही के कारण न केवल दर्शनार्थियों की संख्या घटी है, बल्कि लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंची है। मंदिर प्रबंधन समिति ने प्रशासन से तालाब को बचाने की गुहार लगाई है।