Primary School Interlocking Scam: हरदोई के कस्बा पिहानी के छिपी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में इंटरलॉकिंग घोटाले की सनसनीखेज शिकायत सामने आई है। आरोप है कि विद्यालय की सही-सलामत इंटरलॉकिंग को उखड़वाकर ईंट से खड़ंजा लगवाने की साजिश रची गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह घोटाला स्थानीय सभासद की मिलीभगत से किया जा रहा है। इस मामले ने स्थानीय समुदाय में हड़कंप मचा दिया है, और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
इटरलॉकिंग घोटाले की साजिश
शिकायत के बाद खंड शिक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह ने विद्यालय का दौरा किया। जांच के दौरान पाया गया कि इंटरलॉकिंग को उखाड़ दिया गया था, और विद्यालय में समय से पहले ताला डालकर प्रधानाचार्य राजीव त्रिपाठी फरार हो गए। यह घटना संदेह को और गहरा करती है कि आखिर किसके आदेश पर प्रधानाचार्य ने यह कृत्य किया। प्रियंका सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है, जिसमें मामले की गंभीरता को उजागर किया गया है।
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इटरलॉकिंग घोटाले की साजिश[/caption]
सभासद पर मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस घोटाले में स्थानीय सभासद की मिलीभगत शामिल है। आरोप है कि सभासद और प्रधानाचार्य ने मिलकर सही-सलामत इंटरलॉकिंग को उखड़वाकर ईंट से खड़ंजा लगवाने की योजना बनाई, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके। इस तरह की घटनाएं शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी साजिशें स्कूलों की आधारभूत संरचना को कमजोर करती हैं और बच्चों के भविष्य पर बुरा असर डालती हैं।
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सभासद पर मिलीभगत का आरोप[/caption]
Primary School Interlocking Scam: प्रशासनिक कार्रवाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस मामले में कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। हरदोई में पहले भी मध्यान्ह भोजन योजना और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े घोटाले सामने आ चुके हैं, जहां जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोषियों को निलंबित किया था। इस बार भी जनता को उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। खंड शिक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह की सक्रियता से इस मामले में पारदर्शिता की उम्मीद जगी है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि घोटाले के दोषियों को दंडित किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं के रखरखाव पर निगरानी बढ़ाए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो और बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
प्रियांशू सोनी की रिपोर्ट