MNREGA scam Hamirpur: हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लॉक अंतर्गत गहरौली ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। इस योजना, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी और बुनियादी ढांचा विकास के लिए शुरू किया गया था, का दुरुपयोग हो रहा है। गहरौली ग्राम पंचायत में शनिवार को 417 मजदूरों की फर्जी डिमांड दर्ज की गई, जो योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। यह घोटाला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों का भी हनन करता है।
जियो टैग फोटो में हेराफेरी
मनरेगा योजना के तहत पक्का नाला निर्माण कार्य में गहरौली ग्राम पंचायत में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पता चला कि कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दिखाने के लिए फर्जी डिमांड दर्ज की जा रही है। इसके लिए जियो टैग लोकेशन में फोटो खींचकर अपलोड की जा रही हैं, जो वास्तव में फर्जी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर न तो 417 मजदूर मौजूद थे और न ही नाले का निर्माण कार्य उतना हुआ, जितना कागजों में दिखाया गया। यह फर्जीवाड़ा स्थानीय अधिकारियों और ग्राम पंचायत की मिलीभगत से हो रहा है, जिससे मनरेगा का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
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जियो टैग फोटो में हेराफेरी[/caption]
MNREGA scam Hamirpur: योजना का दुरुपयोग
मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल मजदूरों को 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है, लेकिन गहरौली में यह उद्देश्य विफल होता दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है, जबकि वास्तविक मजदूरों को काम नहीं मिल रहा। सोशल ऑडिट की कमी और पारदर्शिता न होने से यह घोटाला बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि जियो टैग फोटो में केवल कुछ लोगों की तस्वीरें बार-बार इस्तेमाल की जा रही हैं, जो योजना के नियमों का उल्लंघन है।
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MNREGA योजना का दुरुपयोग[/caption]
प्रशासन की चुप्पी
इस मामले में जिला प्रशासन की चुप्पी चिंता का विषय बनी हुई है। मनरेगा नियमों के अनुसार, कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति की जियो टैग फोटो और मस्टर रोल में पारदर्शिता अनिवार्य है, लेकिन गहरौली में इसका खुला उल्लंघन हो रहा है। जिला विकास अधिकारी से इस मामले में जवाब मांगा गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के घोटाले मनरेगा की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं और ग्रामीण विकास को बाधित करते हैं। प्रशासन से मांग है कि सोशल ऑडिट को मजबूत किया जाए और फर्जी डिमांड पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे।
स्वनेश सोनी की रिपोर्ट