उत्तर प्रदेश

गोरखनाथ मंदिर में संगोष्ठी का आयोजन: CM योगी बोले - भारत ने दुशमन को सीमा का अहसास कराया

CM Yogi Gorakhnath Temple Seminar: गोरखपुर के श्री गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं और महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित आठ दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय था ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। 

सीएम ने किया आचार्य चाणक्य का जिक्र

संगोष्ठी में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आचार्य चाणक्य के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “आचार्य चाणक्य ने एक बात कही थी कि अराजक राष्ट्र बहुत शीघ्र समाप्त हो जाता है।” योगी ने इस कथन को विस्तार देते हुए कहा कि अराजकता किसी भी राष्ट्र के लिए घातक होती है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति इसका जीवंत प्रमाण है। अराजकता के कारण पाकिस्तान अपनी स्थिरता और सुरक्षा को लेकर लगातार संकट का सामना कर रहा है। सीएम ने भारत की मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों की सराहना की और कहा कि भारत ने अपनी एकता और संगठित प्रयासों से वैश्विक मंच पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।

भारत आतंकवाद के खिलाफ

मुख्यमंत्री ने भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता पर प्रकाश डालते हुए हाल के वर्षों में किए गए सैन्य अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयर स्ट्राइक हो, या पहलगाम के बाद ऑपरेशन सिंदूर हो, हम लोगों ने सफलतापूर्वक इन ऑपरेशनों को अंजाम देकर दुश्मन को उसकी सीमाओं का अहसास कराया है।” इन अभियानों ने भारत की सैन्य शक्ति और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाया। योगी ने जोर देकर कहा कि भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा और आतंकवाद को करारा जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन ऑपरेशनों ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को विश्व के सामने प्रदर्शित किया, बल्कि शत्रु देशों को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

CM Yogi Gorakhnath Temple Seminar: सात दिवसीय संगोष्ठी 

यह संगोष्ठी सात दिवसीय थी, जिसमें विभिन्न समसामयिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा हुई। 6 सितंबर को ‘भारत की ज्ञान परंपरा’, 7 सितंबर को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की आधारशिला’, 8 सितंबर को ‘संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति’, और 9 सितंबर को ‘भारतीय संस्कृति एवं गोसेवा’ जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समारोह के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी हुआ, जिसमें श्रद्धालु 10 सितंबर तक शाम 3 से 6 बजे तक कथा का रसपान कर सकते थे।