उत्तर प्रदेश
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर का 54 साल बाद खोला गया खजाना, ज्वेलरी बॉक्स खाली..हुआ विवाद
Banke Bihari Temple treasure: मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का खजाना 54 साल बाद फिर से खोला गया। इस खजाने को लेकर भक्तों और आम जनता में भारी उत्सुकता थी। यह खजाना करीब 160 साल पुराना बताया जाता है और इसे लेकर लोगों में उम्मीद थी कि इसमें ठाकुर जी के चढ़ावे के मूल्यवान जेवरात और अन्य वस्तुएं होंगी।
[caption id="attachment_111848" align="alignnone" width="639"] बांके बिहारी[/caption]
चार लोहे के संदूक और एक लकड़ी का खाली संदूक पाए गए।[/caption]
सालों बाद खुला तहखाना
बांके बिहारी मंदिर में इस बार खजाना सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई उच्च प्रबंधन समिति के निर्देश पर खोला गया। मंदिर के पट बंद होने के बाद, सिविल जज जूनियर डिवीजन, शिप्रा दुबे की अगुवाई में अधिकारियों की टीम दोपहर करीब एक बजे मंदिर परिसर में पहुंची। खजाना खोलने की प्रक्रिया करीब डेढ़ बजे शुरू हुई। सबसे पहले गर्भगृह के पास खजाने के लोहे के दरवाजे पर लगा ताला कट्टर से काटा गया। आठ गुणा दस फीट के इस कमरे में काफी मिट्टी भरी हुई थी। मजदूरों ने मिट्टी हटाई और कमरे की जांच शुरू की।Banke Bihari Temple treasure: खाली मिले बक्से
कमरे के अंदर चार लोहे के संदूक और एक लकड़ी का खाली संदूक पाए गए। लोहे के संदूक के कुंडे टूटे हुए थे और उनके बंद ताले संदूक के भीतर रखे गए थे। इन संदूक में पुराने कांसे और पीतल के बर्तन रखे हुए थे। वहीं, लकड़ी का संदूक पूरी तरह खाली निकला। सबसे हैरानी की बात यह रही कि जब संदूक के अंदर ज्वेलरी बॉक्स निकाले गए, तो वे भी खाली पाए गए। इससे वहां मौजूद लोगों में थोड़ी निराशा भी देखने को मिली। [caption id="attachment_111849" align="alignnone" width="625"]आज भी खुलेगा खजाना
बांके बिहारी मंदिर का यह खजाना आखिरी बार वर्ष 1971 में खोला गया था। उस समय ठाकुर जी के चढ़ावे के जेवरात और अन्य वस्तुएं एक बक्से में रखी गई थीं। बाद में यह बक्सा भूतेश्वर स्थित भारतीय स्टेट बैंक में लाकर में रख दिया गया। तब से इस बक्से पर सील लगाई गई थी और इसे खोलने की कोई प्रक्रिया नहीं हुई। मंदिर परिसर में ही खजाने का कमरा होने के बावजूद इसे अब तक खोलना संभव नहीं हुआ। इस बार सुप्रीम कोर्ट की उच्च प्रबंधन समिति के निर्देश पर इसे फिर से खोला गया।Banke Bihari Temple treasure: सुरक्षा और विवाद
खजाना खोलते समय उच्च प्रबंधन समिति द्वारा गठित अधिकारियों की टीम ने सभी नियमों का पालन नहीं किया। मंदिर सेवायतों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद जांच और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सख्त नहीं थी। मंदिर सेवायतों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बार-बार आना-जाना और बिना जांच के खजाने में प्रवेश करना चिंता का विषय है। सेवायत रजत गोस्वामी और समिति सदस्य दिनेश गोस्वामी के बीच बहस भी हुई। रजत गोस्वामी ने कहा,जब आप लोग खजाने के अंदर जा रहे हैं और बाहर आ रहे हैं, तो जांच क्यों नहीं की जा रही है। खजाने में बहुमूल्य आभूषण निकलते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?