मध्य प्रदेश में बढ़ती साइबर ठगी को रोकने के लिए सर

MP सरकार ने साइबर ठगी रोकने के लिए किया कमेटी का गठन, ठगों पर शिकंजा

साइबर ठगी रोकने के लिए किया कमेटी का गठन

मध्य प्रदेश में ठगी करने वाले और लोगों को गुमराह करके चूना लगाने वालों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए मोहन सरकर ने कमेटी का गठन किया। लोगों से छल पूर्वक धन जुटने वाले संस्था और व्यक्तियों के खिलाफ करवाई के लिए यह कमेटी बनाई गई। 

लोगों को करेंगे जागरुक

7 विभागों की अतिरिक्त अपर मुख्य सचिव ADG CID और RBI के अधिकारी को सदस्य बनाया गया। लोगों में सतर्कता और साक्षरता देने के साथ-साथ कमेटी एक्शन लेने का काम करेगी। लोगों का पैसा लौटाने के लिए भी अधिकारी रणनीति बनाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास नगरीय विकास और आवास के साथ-साथ पंचायत एवं ग्रामीण विभाग की अधिकारी कमेटी में शामिल है। 

साइबर ठगी पर लगेगी रोक

MP सरकार का मानना है कि राज्य में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साइबर अपराधी लोगों को आसान लोन, अधिक मुनाफे वाले निवेश, फर्जी प्रॉपर्टी डील और ऑनलाइन ऑफर का लालच देकर ठग रहे हैं। वहीं कई मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, बैंक अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते-धमकातें हैं और खाते से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। हाल के वक्त में “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में भी तेजी आई, जहां लोगों को यह कहकर डराया जाता है कि उनके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल हुआ है या उनके परिवार का कोई मैंबर किसी मामले में फंस गया है। घबराकर लोग ठगों के बताए खातों में रकम भेज देते हैं। 

एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल

इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए MP सरकार ने वित्तीय नियामक संस्थाओं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का फैसला किया। इस टीम में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, नगरीय विकास और पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नामित अधिकारी भी इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगे। अफसरों की टीम लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष रणनीति तैयार करेगी, ताकि साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में समय रहते जानकारी दी जा सके और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।