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सब्जियों में ज़हर: पानी के बाद अब सब्जियों में भी ज़हर! हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी जवाबदेही

सब्जियों में ज़हर: जिस पानी को शहर बहा रहा है, उसी से उग रही सब्जियां अगर हमारी थाली तक पहुंच रही हों तो खतरा कितना बड़ा है. इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सामने आई एक रिपोर्ट ने जबलपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश को चौंका दिया है।

सब्जियों में ज़हर: नालों का पानी बड़ी वजह

मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) ने हाईकोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें बताया गया कि जबलपुर शहर के अधिकांश नालों का पानी सीवेज से बुरी तरह दूषित है.  इसी पानी का इस्तेमाल शहरी और ग्रामीण इलाकों में सब्जियों की खेती के लिए किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. Also Read-मकर संक्रांति की खुशियां मातम में बदलीं: बैरसिया में भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के 5 की मौत

सब्जियों में ज़हर: हाईकोर्ट सख्त

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इस स्थिति को बेहद गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तुरंत अमल किया जाए और विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है।

सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य प्रमुख नालों से पानी के सैंपल लिए. जांच रिपोर्ट में पानी में BOD और टोटल/फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा मानक से कई गुना अधिक पाई गई. यह पानी अनुपचारित सीवेज की श्रेणी में आता है. पीने, नहाने या खेती किसी भी उपयोग के लिए भी नहीं  है. रिपोर्ट के मुताबिक, जबलपुर में प्रतिदिन करीब 174 मेगा लीटर गंदा पानी नालों में बहता है। इसके मुकाबले नगर निगम केवल 58 मेगा लीटर प्रतिदिन पानी का ही शोधन कर पा रहा है.  हालांकि शहर में 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 154.38 मेगा लीटर प्रतिदिन है, लेकिन उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा. Also Read-मोहन सरकार की आज एक और बड़ी बैठक.. महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही मोहन सरकार

करोड़ों की योजनाएं,  फिर हकीकत चिंताजनक

रिपोर्ट में बताया गया कि सीवेज प्रबंधन के लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं. हाल ही में नगर निगम जबलपुर को अमृत 2.0 योजना के तहत 1202.38 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिली है। इसके बावजूद नालों का दूषित पानी नर्मदा और हिरन नदी में मिल रहा है, और खेतों तक पहुंच रहा है.
अब सवाल आपकी थाली का 
हाईकोर्ट में सामने आई यह रिपोर्ट सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम लोगों की सेहत से जुड़ा सीधा सवाल खड़ा करती है. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले दिनों में और भयावह रूप ले सकती है.