हिमाचल में मंदिरों के प्रबंधन पर मचा सियासी संग्राम; VHP ने 37 मंदिर हिंदू समाज को सौंपने की उठाई मांग
हिमाचल प्रदेश में मंदिरों के प्रबंधन को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर धार्मिक असमानता का आरोप लगाते हुए 37 प्रमुख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर हिंदू समाज को सौंपने की मांग की है। इस मुद्दे ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
सरकारी नियंत्रण खत्म करने की मांग
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वीएचपी के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि प्रदेश के मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण समाप्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अन्य धर्मों के पूजा स्थलों का संचालन उनके समुदायों के पास है, जबकि हिंदू मंदिरों पर सरकारी हस्तक्षेप जारी है, जो धार्मिक असमानता को दर्शाता है।
‘धार्मिक असमानता’ का आरोप
परिषद ने कहा कि हिमाचल के 37 प्रमुख मंदिर अब भी सरकारी नियंत्रण में हैं, जबकि उनकी आय हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचती है। वीएचपी का मानना है कि इस धन का उपयोग केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों में होना चाहिए, न कि प्रशासनिक खर्चों में।
परांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि भारतीय जनता पार्टी राज्य की सत्ता में आती है, तो उनके सामने भी यह मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा।
अवैध कब्जों और ‘लैंड जिहाद’ का मुद्दा
प्रेस वार्ता में परिषद ने ‘लैंड जिहाद’ का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण हो रहे हैं। संजौली, मंडी समेत अन्य स्थानों का हवाला देते हुए संगठन ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
लव जिहाद और धर्मांतरण पर चेतावनी
वीएचपी ने कथित ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण के मामलों को सामाजिक असंतुलन का कारण बताया। संगठन का कहना है कि इससे समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। परिषद ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो व्यापक जनजागरण अभियान और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
परिषद के अनुसार, इन मंदिरों में हर साल 200 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में 37 मंदिरों की कुल आय 200.59 करोड़ रुपये रही, जबकि 346.26 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा हैं। मंदिरों के पास सोना-चांदी का भी पर्याप्त भंडार है।