हिमाचल प्रदेश सरकार ने सिंथेटिक ड्रग 'चिट्टा' के ख

‘चिट्टे’ के नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार हुई सख्त; बेटियों को बचाने के लिए एक्शन प्लान हुआ तैयार

‘चिट्टे’ के नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार हुई सख्त; बेटियों को बचाने के लिए एक्शन प्लान हुआ तैयार

हिमाचल प्रदेश में तेजी से फैल रहे ‘चिट्टा’ (सिंथेटिक ड्रग) के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने सख्त कदम उठाने की घोषणा की है। खासकर बेटियों को इस घातक नशे से बचाने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है, जिससे राज्य में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।

हिमाचल सीएम सुक्खू

डी-एडिक्शन सेंटर से होगी शुरुआत

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि 20 मई से शिमला के पास मशोबरा में पुलिस की देखरेख में एक डी-एडिक्शन सेंटर शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, कांगड़ा जिले के टांडा में भी जल्द ही एक और सेंटर खोला जाएगा। इन केंद्रों का उद्देश्य नशे की गिरफ्त में आए युवाओं का उपचार और पुनर्वास करना है।

परिजनों को भी मिलेगा सहयोग

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवार को अपने बच्चे के नशे में फंसे होने की जानकारी मिलती है, तो वे बिना डर के 112 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। पुलिस न केवल मदद करेगी, बल्कि शिकायतकर्ता को पूरी सुरक्षा भी दी जाएगी और किसी तरह की कानूनी कार्रवाई से बचाया जाएगा।

राज्य सरकार ने प्रोफेशनल कोर्स में पढ़ने वाले युवाओं के लिए ड्रग टेस्ट कराने की योजना भी बनाई है। यदि कोई युवा नशे का आदी पाया जाता है, तो उसे सजा देने के बजाय पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बढ़ती चिंता: बेटियां भी चिट्टे की चपेट में

हिमाचल में नशे का दायरा अब युवतियों तक भी पहुंच चुका है। हाल के मामलों में लड़कियों के चिट्टे के सेवन और तस्करी में शामिल होने की घटनाएं सामने आई हैं। कुल्लू और ठियोग में युवतियों की गिरफ्तारी ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में चिट्टे के सेवन से 66 युवाओं की मौत हो चुकी है, जो इस समस्या की भयावहता को दर्शाता है।

तस्करों पर की जाएगी सख्त कार्रवाई

सरकार ने चिट्टा तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सूचना देने वालों के इनाम को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया है। साथ ही, तस्करों की संपत्तियों को जब्त और नष्ट करने की कार्रवाई भी की जाएगी। अब तक 76 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की 234 पंचायतें चिट्टा समस्या से प्रभावित हैं। पंचायत चुनावों के बाद इस अभियान को और तेज किया जाएगा। साथ ही, अधिकारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन (ACR) में भी नशा विरोधी कार्रवाई को शामिल किया जाएगा।