खिवनी अभयारण्य के बाघ युवराज का भोपाल के वन विहार

भोपाल के वनविहार में बाघ ‘युवराज’ का इलाज जारी, वर्चस्व की लड़ाई में हुआ था घायल

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देवास जिले के खिवनी अभयारण्य से रेस्क्यू किए गए घायल बाघ ‘युवराज’ का उपचार भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में जारी है। क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल हुए इस बाघ के दोनों पंजों में गहरे घाव हैं, जिसके चलते वह शिकार करने में भी असमर्थ हो गया था। वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

चार घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भोपाल लाया गया

वन विहार प्रबंधन के अनुसार शनिवार को करीब चार घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान के बाद बाघ को सुरक्षित पकड़ा गया। घायल होने के बावजूद बाघ सतर्क और आक्रामक स्थिति में था, जिससे अभियान काफी जटिल बन गया।वन विहार के निदेशक विजय कुमार ने बताया कि वन विभाग और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने जोखिम उठाते हुए बाघ को ट्रैंक्विलाइज किया। खिवनी क्षेत्र में हाथी उपलब्ध नहीं होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन और अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। सभी आवश्यक सावधानियों के बाद उसे विशेष वाहन से भोपाल स्थित वन विहार पहुंचाया गया।

वर्चस्व की लड़ाई में हार गया ‘युवराज’

वन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 10 वर्षीय बाघ युवराज लंबे समय तक खिवनी अभयारण्य का प्रमुख और प्रभावशाली बाघ रहा है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ उसका प्रभाव क्षेत्र कमजोर होने लगा।इसी दौरान लगभग 4 से 5 वर्ष के युवा बाघ ‘अधिराज’ ने क्षेत्र पर कब्जे की चुनौती पेश की। दोनों बाघों के बीच हुए संघर्ष में युवराज बुरी तरह घायल हो गया। लड़ाई के दौरान उसके दोनों पंजों में गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी सामान्य गतिविधियां और शिकार करने की क्षमता प्रभावित हो गई।