जब साल का आखिरी दिन बन गया 0 जनवरी! जानिए कैलेंडर की इस अजब-गजब कहानी को
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: आमतौर पर साल के आखिरी दिन को 31 दिसंबर और नए साल की शुरुआत को 1 जनवरी माना जाता है लेकिन क्या आप जानते है कि इतिहास में एक ऐसा समय भी आया जब 31 दिसंबर को ‘0 जनवरी’ कहा गया था? यह केवल एक दिलचस्प मजेदार तथ्य नहीं बल्कि वैज्ञानिक और ऐतिहासिक कारणों से जुड़ा था.
दरअसल, साल 1700 में स्वीडन ने जूलियन कैलेंडर छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाने का फैसला किया. हालांकि, जूलियन कैलेंडर के अनुसार 1700 लीप ईयर था, लेकिन स्वीडन ने उस साल कोई लीप ईयर नहीं बनाया. इसके बाद 1704 और 1708 में, नॉर्थर्न वॉर के कारण स्वीडन का ध्यान अपने कैलेंडर से हट गया और इन सालों में भी लीप ईयर रह गए. इस भ्रम से बचने के लिए स्वीडन ने वापस जूलियन कैलेंडर अपनाया और साल 1712 में, जो पहले से लीप ईयर था, वहां 30 फरवरी भी दर्ज की गई, जो इतिहास में अद्वितीय हैं.
इसी तरह एस्ट्रोनॉमी के पुराने कैलेंडरों में 31 दिसंबर को कभी-कभी ‘जीरो जनवरी’ कहा जाता था. इसका मतलब यह था कि यह तारीख 1 जनवरी से पहले आती थी. साल 1900 में समय और खगोल विज्ञान से जुड़े कुछ वैज्ञानिक कैलकुलेशन और टेबलें इसी ‘जीरो जनवरी’ से शुरू होती थी. रोचक तथ्य यह है कि ब्रिटिश दो इंजन वाला जेट, लीयर फैन 2100 के सरकारी रिकॉर्ड में भी 31 दिसंबर की जगह 32 दिसंबर 1980 दर्ज हैं. इस जेट की पहली टेस्ट फ्लाइट तकनीकी खराबी के कारण रद्द हो गई और प्रोटोटाइप ने 1 जनवरी 1981 को उड़ान भरी. इतिहास और विज्ञान में कभी-कभी ऐसे छोटे लेकिन दिलचस्प मोड़ आते है, जो हमारी रोजमर्रा की जानकारियों को बिल्कुल नया रंग देते हैं.
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