बिहार

औरंगाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर फटे ग्रामीण, ताला जड़कर किया जोरदार प्रदर्शन

धीरेन्द्र पाण्डेय/न्यूज़11 भारत बिहार/डेस्क: औरंगाबाद से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर ग्रामीणों का सब्र टूट गया हैं. बारुण प्रखंड का सुंदरगंज स्वास्थ्य केंद्र, जहां शनिवार सुबह ग्रामीण इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन अस्पताल बंद मिला. आरोप है कि यह केंद्र शायद ही कभी समय पर खुलता है और अधिकतर दिन स्टाफ गायब रहता हैं. 

ग्रामीणों का गुस्सा उस समय और भड़क गया, जब करीब 11 बजे पहुंचने वाले स्टाफ नर्स अमिताभ रंजन को भी लोगों ने अस्पताल के अंदर जाने से रोक दिया. थोड़ी देर बाद क्लर्क निर्मला कुमारी और अन्य कर्मचारी पहुंचे, लेकिन तब तक ग्रामीणों ने मेन गेट में ताला जड़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया था. स्थिति बिगड़ने पर प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक मनीष कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि एएनएम ललिता कुमारी बिना सूचना के अनुपस्थित थी, जबकि बाकी कर्मचारी भी निर्धारित समय से देरी से पहुंचे थे.

मनीष कुमार ने बताया कि केंद्र में डॉक्टर प्रकाश रावत की पोस्टिंग है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते वे अन्य जगह ड्यूटी कर रहे हैं. नतीजा हेल्थ सेंटर केवल स्टाफ नर्स और एएनएम के भरोसे चल रहा है, और वह भी अनियमित रूप से. ग्रामीण बबलू कुमार सिंह, मोनू गुप्ता और अन्य लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है. डॉक्टर नहीं, जांच नही और मरीज 10 किलोमीटर दूर दूसरे केंद्र पर जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई, स्थायी डॉक्टर की तैनाती और 24×7 स्वास्थ्य सेवा बहाल करने की मांग की है. चेतावनी भी दी है अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग ने मामले की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन ग्रामीणों की जो नाराज़गी हैं. वह बताती है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थिति कितनी गंभीर है.

यह भी पढ़े: नीतीश कैबिनेट की पहली बैठक आज, कई अहम एजेंडों पर होगा फैसला