मध्य प्रदेश में वन विभाग की टीमों पर हमले बढ़ने के

मध्य प्रदेश में कब्जा हटाने के दौरान पिटने वाले वन विभाग को ट्रेनिंग देगा पुलिस विभाग

मध्य प्रदेश में अतिक्रमण हटाने और वन अपराधों की कार्रवाई के दौरान लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब वनकर्मियों को भीड़ नियंत्रण (माब कंट्रोल) और विवाद की स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग पुलिस विभाग देगा। वन विभाग ने इसके लिए पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को पत्र लिखकर प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया है।

वन विभाग की टीमों पर हमले के मामले

दरअसल, पिछले कुछ समय में प्रदेश के कई जिलों में अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीमों पर हमले के मामले सामने आए हैं। बुरहानपुर, खंडवा, डिंडोरी समेत कई जिलों में कार्रवाई के दौरान वनकर्मियों को विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में तो बड़ी संख्या में लोगों ने वनकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट तक की गई।

सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी

वन विभाग का कहना है कि कई बार कर्मचारी बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों, बजट और हथियारों के अतिक्रमण हटाने और वन अपराध रोकने की कार्रवाई करते हैं। ऐसे में जंगल क्षेत्रों में अपराधियों या भीड़ से सामना होने पर स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अमित कुमार दुबे ने पुलिस विभाग को भेजे पत्र में कहा है कि वन अपराध, अवैध अतिक्रमण और सामूहिक अवैध कटाई रोकने के दौरान वन अमले पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने लिखा कि कर्मचारियों को अपराधियों के समूह से संवाद करने, तनावपूर्ण हालात नियंत्रित करने और हमले की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है।

वन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे

पत्र में विशेष रूप से मुरैना, शिवपुरी, देवास, खंडवा और बुरहानपुर जिलों के वन कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर माब कंट्रोल ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। साथ ही पुलिस विभाग से मास्टर ट्रेनर उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण कार्यक्रम की पूरी जानकारी साझा करने का आग्रह किया गया है।

वन विभाग को उम्मीद है कि पुलिस की विशेषज्ञता से वनकर्मी ज्यादा सुरक्षित तरीके से अतिक्रमण हटाने और वन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे।