UTU के पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी पर पहले भी पेपर लीक करने का आरोप
उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटीके पेपर लीक मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता पहले भी यूनिवर्सिटी के पेपर तैयार कर चुका है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी 2010 से देहरादून के 4 बड़े कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर रहा। सबसे हैरानी की बात यह है कि आरोपी 2010 में भी असिस्टेंट प्रोफेसर था और जुलाई 2026 तक भी इसी पद पर बना हुआ है।
16 सालों से कर रहा पेपर तैयार
इन 16 सालों में उसने कई बार पेपर तैयार किए, जिन्हें UTU के प्रश्नपत्रों में शामिल किया गया। लेकिन 2019 से उसकी भूमिका अधिक सामने आ रही है, जब उसने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नौकरी जॉइन की। जांच एजेंसियों को शक है कि पहले आयोजित परीक्षाओं में भी पेपर लीक हुए हो सकते हैं। इसी वजह से अब पुराने एग्जाम भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इस मामले में डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है।
पेपर लीक का खुलासा
आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 316, 318(4) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मोबाइल, लैपटॉप, E Mail, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि पेपर लीक का खुलासा यूनिवर्सिटी के किसी इंटरनल ऑडिट, मॉनिटरिंग सिस्टम या परीक्षा नियंत्रण व्यवस्था से नहीं हुआ। मामला एक गुमनाम मेल के जरिए सामने आया। 8 जुलाई को मशीन लर्निंग एंड इंटरनेट ऑफ थिंग्स सबजेक्ट की परीक्षा हुई थी। परीक्षा के बाद विश्वविद्यालय को एक अज्ञात मेल मिला।
कैसे हुआ खुलासा?
ईमेल में आरोप लगाया गया कि पेपर तैयार करने वाले प्रोफेसर ने 3 जुलाई की रात 22 छात्रों के एक वॉट्सएप ग्रुप में परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न भेजे थे। यूनिवर्सिटी ने जब मेल में बताए गए प्रश्नों का मूल प्रश्नपत्र से मिलान किया तो वे पूरी तरह मेल खा गए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने 24 जून को आयोजित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषय का प्रश्नपत्र भी तैयार किया था। हालांकि उस परीक्षा में पेपर लीक की सीधी शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन शक के आधार पर UTU ने एहतियाती कदम उठाते हुए उस परीक्षा को भी रद्द कर दिया।