उत्तराखंड में बारिश का कहर, चारधाम यात्रा पर लगी फिलहाल रोक
उत्तराखंड में बारिश का कहर, चारधाम यात्रा पर लगी फिलहाल रोक
उत्तराखंड में लगातार बारिश का कहर देखने को मिल रहा हैं दो दिनों से लगातार रुक-रुककर बारिश जारी हैं इस के बीच एहतियातन चारधाम यात्रा फिलहाल रोक दी गई है। गढ़वाल कमिश्नर ने मार्ग में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने और रास्ते सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। बागेश्वर के कपकोट में शिवालय मंदिर के पास 8 वर्षीय राकेश सरयू नदी में बह गया। SDRF, NDRF और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हैं।
कई घटनाये आई सामने
01 चंपावत के टनकपुर में कार 10 फीट गहरी खाई में गिरने से चार लोग घायल हो गए। पूर्णागिरी मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात कुछ देर बाधित रहा। रुद्रप्रयाग में भूस्खलन से केदारनाथ हाईवे और चमोली में नंदप्रयाग के पास मलबा आने से बद्रीनाथ हाईवे कुछ समय के लिए बंद रहा।
02 नंदप्रयाग में एक बोलेरो मलबे में फंस गई, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। कोटेश्वर के पास अलकनंदा नदी भी उफान पर है। देहरादून के डोईवाला में अस्थायी पुल बह गया। टिहरी में एनएच-34 और उत्तरकाशी में यमुनोत्री हाईवे भी भूस्खलन व बोल्डर गिरने से बाधित रहे।
03 चमोली के नारायणबगड़ बाजार में मलबा और बरसाती पानी घुसने से दुकानों को नुकसान हुआ और सिमली-ग्वालदम हाईवे प्रभावित रहा। थराली-देवाल मार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया। घाघली गधेरे से हर साल आने वाले मलबे से राड़ीबगड़ गांव पर खतरा बना हुआ है।
देहरादून, टिहरी और हरिद्वार में रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार के लिए देहरादून, टिहरी और हरिद्वार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
वहीं, नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, उत्तरकाशी और पौड़ी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट है। मौसम विभाग ने इन जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और तेज बारिश के दौर की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड में दो दिनों से लगातार रुक-रुककर बारिश जारी हैं
उत्तराखंड में पिछले दो दिनों से लगातार रुक-रुककर बारिश जारी है। रुद्रप्रयाग में भी लगातार हो रही बारिश आफत बन चुकी है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन होने से यात्रा बार-बार बाधित हो रही है, जिससे प्रशासन और तीर्थयात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।