उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भूस्खलन से रामगंगा नदी

उत्तराखंड में भूस्खलन, रामगंगा नदी पर बनी झील, 700 लोगों पर खतरा

रामगंगा नदी पर बनी झील

उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर हरड़िया के पास पहाड़ी दरकने से रामगंगा नदी का प्रवाह रुक गया। भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर नदी में गिरने से करीब 600 m लंबी झील बन गई है। भैंसकोट की ओर झील का आकार लगातार बढ़ रहा है और इससे आसपास के भैंसखाल, बासगुन और छीपा समेत 5 गांवों की 600 से 700 आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है।

रामगंगा नदी का बहाव बाधित

थल-मुनस्यारी मार्ग पर रातीगाड़ और हरड़िया की पहाड़ियां लंबे वक्त से भूस्खलन प्रभावित हैं। 4 जुलाई को हुई जोरदार बारिश के बाद बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर रामगंगा नदी में आ गिरे। इससे नदी का बहाव बाधित हो गया और पानी जमा होने से झील बन गई। नदी का जलस्तर बढ़ने से रामगंगा पर बने अस्थायी पुल बह गए। इन पुलों के जरिए पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के ग्रामीण रोजाना आवाजाही करते थे। पुल बहने से लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ और स्थानीय स्तर पर आवाजाही प्रभावित हुई है। 

अचानक बाढ़ आने का खतरा 

रामगंगा नदी में मलबा जमा होने से 2013, 2016 और 2024 में भी झील बन चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि ऐसी झील अचानक टूट जाए तो नीचे बसे इलाकों में अचानक बाढ़ आने का खतरा रहता है। मुनस्यारी के SDM डॉ. ललित मोहन तिवारी ने बताया कि हरड़िया समेत संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रामगंगा नदी में झील बनने की सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।