बस्तर में तिरंगा यात्रा शुरू हो गई है, जिसमें स्था

डिप्टी CM के साथ तिरंगा लेकर निकले बाइकर्स, 300 KM सफर कर पहुंचेंगे कर्रेगुट्टा

तिरंगा यात्रा बस्तर में

जहां कभी नक्सलियों का दबदबा हुआ करता था, वहां अब तिरंगा लहराने का संदेश दिया जा रहा है। बस्तर में बुधवार से 3 दिवसीय तिरंगा यात्रा शुरू हुई। नारायणपुर से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में बाइकर्स, स्थानीय युवा, पुलिस, CRPF जवान और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। डिप्टी CM विजय शर्मा खुद बुलेट चलाकर यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं।

नारायणपुर से शुरू हुआ सफर

तिरंगा यात्रा नारायणपुर से शुरू होकर बस्तर के संवेदनशील इलाकों से गुजर रही है। यात्रा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के उन इलाकों से होकर जाएगी, जिन्हें कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। बाइकर्स हिड़मा और देवा जैसे नक्सली कमांडरों के प्रभाव वाले इलाकों से तिरंगा लेकर गुजर रहे हैं। 14 अगस्त को कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के साथ यात्रा का समापन होगा।

शहीद स्थलों की मिट्टी की जा रही एकत्र

यात्रा के दौरान जहां-जहां जवान शहीद हुए, वहां से मिट्टी एकत्र की जा रही है। बारसूर के शहीद चौक पर भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद यात्रा दंतेवाड़ा की ओर रवाना हुई। डिप्टी CM विजय शर्मा ने कहा कि शहीद जवानों के बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा। उनके सम्मान में स्मारक बनाने की बात भी कही गई है।

बस्तर अब नक्सलमुक्त

विजय शर्मा ने कहा कि इस यात्रा में पूरे बस्तर के युवा एकजुट हुए हैं। यात्रा के जरिए संदेश दिया जा रहा है कि बस्तर अब नक्सलमुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि जवानों के बलिदान और उनकी शहादत की यादों को हमेशा जीवित रखा जाएगा। यात्रा बारसूर के इंद्रावती सातधार पुल से भी गुजरी। दंतेवाड़ा के रास्ते अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार माने जाने वाले इस क्षेत्र को कभी नक्सलियों का कोर जोन माना जाता था। इसी रास्ते से बाइकर्स का काफिला तिरंगा लेकर आगे बढ़ा।

संवेदनशील इलाकों में कड़ी सुरक्षा

तिरंगा यात्रा के रूट पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। BDS की टीम मेटल डिटेक्टर से रास्तों की जांच कर रही है। बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे संवेदनशील इलाकों से भी यात्रा गुजरेगी। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय युवा शामिल हुए। महिलाएं भी स्कूटी पर तिरंगा लेकर यात्रा का हिस्सा बनीं। कड़ेमेटा-बोदली के बीच बाइकर्स हेडलाइट जलाकर आगे बढ़े।

ग्रामीणों ने रोजगार की मांग रखी

यात्रा कोंडागांव जिले के आखिरी गांव कड़ेनार भी पहुंची। यह गांव दंतेवाड़ा, कोंडागांव और नारायणपुर की सीमा से लगा है। यहां ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने रोजगार की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।

14 अगस्त को कर्रेगुट्टा में फहराएगा तिरंगा

3 दिवसीय तिरंगा यात्रा का अंतिम पड़ाव कर्रेगुट्टा पहाड़ी है। 14 अगस्त को यहां तिरंगा फहराया जाएगा। यात्रा के जरिए नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में शांति, सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।