प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन,CM डॉ मोहन यादव ने जताया दुख
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रायपुर के एम्स अस्पताल में निधन हो गया है. वह 70 वर्ष, 2 महीने और 11 दिन की थीं. 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग के गनियारी गांव में जन्मीं डॉ. तीजन बाई लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं. उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और MP के मुख्यमंत्री ने दुख जताया है.
डॉ तीजन बाई छत्तीसगढ़ की 'पारधी' अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं. बचपन में अपने नाना ब्रजलाल पारधी को छत्तीसगढ़ी हिंदी में महाभारत की कहानियां गाते सुनकर उन्हें ये कहानियां याद हो गई थीं, जिसके बाद उन्होंने उमेद सिंह देशमुख से इसका अनौपचारिक प्रशिक्षण भी लिया.
13 साल की उम्र में पहली प्रस्तुति
मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया था. उस दौर में महिलाएं केवल बैठकर पंडवानी गाती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है. तीजन बाई पहली ऐसी महिला थीं, जिन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाली 'कापालिक शैली' को चुना और खड़े होकर दमदार आवाज में प्रदर्शन करना शुरू किया.
इसको लेकर सीएम डॉ मोहन यादव एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि...
प्रख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
अपनी अद्वितीय कला, ओजस्वी प्रस्तुति और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं पंडवानी गायन को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। कला जगत में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं प्रशंसकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शांति!