सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर

चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CEC ने सौंपी रिपोर्ट; 22 जुलाई को होगी अहम सुनवाई

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की अगली सुनवाई से पहले सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी यानी CEC ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में चंबल अभयारण्य की सुरक्षा और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। इस मामले में 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

CEC ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के भीतर आने वाली राजस्व भूमि को छह महीने के भीतर संरक्षित वन घोषित किया जाए। समिति का कहना है कि ऐसा करने से वन कानून के तहत कार्रवाई करने में आने वाली कानूनी बाधाएं दूर होंगी और अवैध रेत खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

पूरे क्षेत्र की निगरानी करने का सुझाव दिया

रिपोर्ट में अभयारण्य की निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया गया है। CEC ने छह महीने के भीतर हाईटेक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की सिफारिश की है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित थर्मल कैमरे, PTZ कैमरे और ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी करने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा चंबल से जुड़े सभी जिलों में संयुक्त निगरानी और प्रवर्तन समितियां बनाने की बात कही गई है, ताकि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में बेहतर तालमेल बनाया जा सके।

अवैध परिवहन पर नजर रखी जा सके

CEC ने अवैध रेत खनन में शामिल वाहनों, फाइनेंसरों और अपराधियों का साझा डिजिटल डाटाबेस तैयार करने की भी सिफारिश की है। साथ ही सभी प्रमुख पुलों पर AI आधारित ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लगाने का सुझाव दिया गया है, जिससे अवैध परिवहन पर नजर रखी जा सके।

अहम दिशा-निर्देश जारी हो सकते

रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी लाइसेंस प्राप्त रेत भंडारण डिपो बनाने की बात कही गई है, ताकि अवैध तरीके से निकाली जाने वाली रेत की बिक्री और परिवहन पर रोक लगाई जा सके। अब सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को इस पूरे मामले पर सुनवाई करेगा, जिसमें चंबल अभयारण्य के संरक्षण को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं।