अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर नजर,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश,हाईकोर्ट के स्टे आदेश निरस्त
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही कार्रवाई में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट के इस रुख के बाद राजधानी में अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई फिर तेज होने की संभावना है।
हाईकोर्ट से मिले स्टे आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किए निरस्त
मामले में कई दुकान संचालकों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली थी और कार्रवाई पर रोक लगाने वाले स्टे आदेश जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन सभी राहत आदेशों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसके निर्देशों के तहत चल रही जांच और कार्रवाई में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
MP सरकार की जांच समिति पर भी उठे सवाल
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समिति की कार्रवाई और प्रक्रिया को लेकर दलीलें पेश की गईं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी निगरानी में चल रही प्रक्रिया के समानांतर कोई अन्य कार्रवाई या जांच ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे न्यायालय के आदेश प्रभावित हों।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन की ओर से पेश अधिवक्ता को भी सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। किसी भी वैकल्पिक प्रक्रिया के जरिए न्यायालय के निर्देशों को कमजोर नहीं किया जा सकता।
नगर निगम ने बताई कार्रवाई में आ रही बाधाएं
सुनवाई के दौरान भोपाल नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि निगम अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन अलग-अलग स्तर पर आने वाली कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
नगर निगम ने कहा कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
अवैध निर्माण पर फिर चलेगा निगम का अभियान
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब भोपाल में अवैध निर्माण और आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ निगम की कार्रवाई दोबारा गति पकड़ सकती है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तय प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए जाएं।
राजधानी में लंबे समय से चल रहे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अवैध निर्माण करने वालों और नियमों के खिलाफ काम करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।