चीनी मिलों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए शक्कर

चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी संभव, खाद्य मंत्री ने दिए संकेत और कहा.......

Sugar Minimum Selling Price (MSP)

चीनी मिलों को वित्तीय संकट से उबारने की तैयारी

चीनी मिलों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए केन्द्र सरकार शक्कर के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ा सकती है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने दिल्ली में इस बात के संकेत दिये। उन्होंने कहा कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने के लिए उद्योग की मांग पर केंद्र गंभीरता से विचार कर रहा है। चीनी मिल उद्योग काफी दिनों से इसकी मांग कर रहा है।

15 लाख टन निर्यात को मंजूरी, शीरे पर शुल्क शून्य

केन्द्र सरकार ने ने चीनी मिल को बड़ी राहत देते हुए अक्तूबर से शुरू होने वाले 2025-26 विपणन वर्ष के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात को पहले ही मंजूरी प्रदान की है। साथ ही गन्ने के शीरे पर निर्यात शुल्क हटाकर इसे शून्य कर दिया है। अब केन्द्र सरकार शुगर मिलों को राहत देने के लिए चीनी के फ्लोर प्राइस और एथेनॉल रेट बढ़ाने पर विचार कर रही है। बढ़ती गन्ना लागत, सरप्लस स्टॉक और मिलों के भुगतान संकट को देखते हुए प्रस्ताव तैयार हैं। इससे मिलों को घाटा कम करने और किसानों को समय पर भुगतान में मदद मिलेगी।

2019 से एमएसपी स्थिर, उद्योग 40 रुपये प्रति किलो की मांग पर अडिग

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा, फरवरी, 2019 से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित बना हुआ है। चीनी उद्योग की संस्था "इस्मा" उत्पादन लागत में वृद्धि को देखते हुए कीमत को बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहा है। जोशी ने कहा, 2024-25 सीजन में 10 लाख टन निर्यात की अनुमति देने के बाद कीमतें स्थिर थीं। मंत्रालय चीनी की कीमतों पर निर्यात के प्रभाव का आकलन करेगा। फिर न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग पर विचार करेगा।

2025-26 के लिए 15 लाख टन निर्यात मंजूर, प्रभाव का होगा विश्लेषण

केन्द्रीय मंत्री जोशी ने एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा, पिछले 2024-25 सत्र में, 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने के बाद कीमतें स्थिर थीं। अब हमने 2025-26 सत्र के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्री जोशी ने कहा कि, मंत्रालय चीनी की कीमतों पर निर्यात के प्रभाव का आकलन करेगा और फिर न्यूनतम विक्रय मूल्य बढ़ाने की मांग पर विचार करेगा।

एफआरपी बढ़ने से लागत 40.24 रुपये प्रति किलो पहुंची: इस्मा

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) का कहना है कि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) कुछ वर्षों में 275 रुपये प्रति क्विंटल से 29 फीसदी बढ़कर 355 रुपये प्रति क्विंटल (2025-26) हो गया है। इससे चीनी की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है, जो अब 40.24 रुपये प्रति किलोग्राम अनुमानित है। ऐसे में विपणन वर्ष 2025-26 के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को कम से कम 40.2 रुपये प्रति किलोग्राम तक संशोधित करने पर विचार करना चाहिए।

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