स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन जल्द, 1500 गांव की ढाई लाख हेक्टेयर भूमि की होगी सिंचाई
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने की नर्मदा घाटी विकास, जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा
- अगले 6 माह में 14 जिलों में 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेंगी सिंचाई सुविधाएं
- केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित
- सिंहस्थ के लिए शिप्रा घाटों के निर्माण का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 जून को मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास और जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ष 14 जिलों में जिन सिंचाई परियोजनाओं के कार्य पूर्ण हो गए हैं। उनके लोकार्पण की तैयारी कर ली गई है। आगामी 6 माह में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि करने वाली इन परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जानकारी दी गई कि कृषक कल्याण वर्ष में जिन सिंचाई परियोजनाओं के लोकार्पण होंगे, उनमें बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला जिलों की सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी तीन परियोजनाओं के कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि केन-मंदाकिनी लिंक अन्तर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। इस परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा और 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। परियोजना में 20 किलोमीटर लंबाई की टनल भी बनाई जाएगी। परियोजना की लागत 8400 करोड़ रुपए से अधिक होगी।
सिंहस्थ से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यों में प्रगति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ आयोजन के उद्देश्य से पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इनमें सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82% कार्य पूर्ण हो गया है। बैठक में बताया गया कि कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66% प्रगति है। शिप्रा तट पर सिंहस्थ में करोड़ों लोगों द्वारा सुविधाजनक ढंग से पुण्य स्नान का लाभ लेने के दृष्टि से 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस कार्य में भी 60% प्रगति है।
सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि
प्रदेश में सिंचित रकबा निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं से निकट भविष्य में मिलने वाले लाभ को जोड़ें तो प्रदेश में सिंचित क्षेत्र 95. 45 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा अन्य स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं को समाहित करें तो यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर होगा। कार्यों को तेजी से पूरा किए जाने के फलस्वरूप सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार हो रहा है। गत ढाई वर्ष में लगभग 10 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है।
केन-बेतवा अंतर्राज्यीय परियोजनाओं में पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज
बैठक में जानकारी दी गई कि केन -बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में बुंदेलखण्ड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन भी होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चम्बल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के वर्ष 2024 से पुनर्निर्माण के कार्य प्रारंभ हुए, जो लगभग पूर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चतुर्थ बांध परियोजना (छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स) के कार्यों और अन्य परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा की।
सिंचाई की प्राप्त होगा वरदान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन के लिए आवश्यक तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का वरदान प्राप्त होगा। दायीं तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116 के मध्य निर्मित इस टनल का कार्य लगभग डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल लम्बाई 11.952 किलोमीटर और जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। टनल का डायमीटर 10.140 मीटर है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने में इस टनल की विशेष उपयोगिता होगी।