एसजीपीसी ने वायरल वीडियो विवाद पर मुख्यमंत्री भगवं

एसजीपीसी का बड़ा फैसला: पंजाब CM मान के खिलाफ FIR की मांग, वायरल वीडियो विवाद पर गरमाई सिख राजनीति

एसजीपीसी का बड़ा फैसला: पंजाब CM मान के खिलाफ FIR की मांग, वायरल वीडियो विवाद पर गरमाई सिख राजनीति

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) ने शनिवार को एक विशेष जनरल हाउस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। वायरल वीडियो विवाद को लेकर बुलाई गई इस अहम बैठक में प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया है, जिसके चलते उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी

FIR की मांग और इस्तीफे की सिफारिश

बैठक में पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नैतिक आधार पर पद पर बने रहने का अधिकार खो दिया है और उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। एसजीपीसी ने इसे सिख संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया और कड़ा रुख अपनाया।

5 जुलाई को पंथिक एकत्रीकरण का ऐलान

एसजीपीसी ने यह भी घोषणा की कि 5 जुलाई को गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हॉल में पंथिक एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम अकाल तख्त के स्थापना दिवस के बाद होगा। इसमें विभिन्न सिख संगठनों, दमदमी टकसाल, निहंग जत्थेबंदियों, सिंह सभाओं, सिख संस्थाओं, विद्वानों, बुद्धिजीवियों और समुदाय के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अकाल तख्त के आदेशों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

अकाल तख्त के आदेश पर विवाद

अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री मान द्वारा अकाल तख्त के आदेश को चुनौती देना सिख संस्थाओं के प्रति उनके रवैये को दर्शाता है। उन्होंने एसजीपीसी सदस्यों से अपील की कि वे समुदाय के बीच अकाल तख्त के निर्णयों को व्यापक रूप से फैलाएं।

अकाल तख्त

महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध

बैठक में एक अन्य प्रस्ताव में महाराष्ट्र सरकार द्वारा नांदेड़ स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब के प्रबंधन से जुड़े 1956 के कानून में बदलाव के प्रयास का विरोध किया गया। एसजीपीसी ने मांग की कि सरकार इस प्रस्ताव को वापस ले और मौजूदा कानून में कोई संशोधन न किया जाए।

बैठक में मतभेद भी सामने आए

बैठक के दौरान कुछ सदस्यों ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए। सदस्य जसवंत सिंह पुरैन ने कहा कि एसजीपीसी को अपनी गलतियों से सीखना चाहिए, खासकर पिछले विज्ञापन विवादों से जुड़े मामलों में, ताकि भविष्य में वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।

पंजाब सीएम भगवंत मान

पूर्व अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने भी मौजूदा पदाधिकारियों की कार्यशैली पर आलोचना की, हालांकि उनका भाषण एसजीपीसी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव प्रसारण में नहीं दिखाया गया। बाद में प्रेस वार्ता में एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि अकाल तख्त के आदेशों के प्रचार के लिए धर्म प्रचार समिति के फंड का उपयोग फ्लेक्स बोर्ड लगाने में किया जा रहा है।