मंत्री के क्षेत्र में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती ,20 साल से सड़क खराब, मरीजों को खाट पर लिटाकर डेढ़ किमी तक कीचड़ में चलना पड़
मंत्री के क्षेत्र में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती ,20 साल से सड़क खराब, मरीजों को खाट पर लिटाकर डेढ़ किमी तक कीचड़ में चलना पड़ता है
क्या आप सोच सकते हैं कि आज भी कई ऐसे गांव हैं जहाँ 20 साल से सड़क खराब हैं और मरीजों को खाट पर लिटाकर डेढ़ किमी तक कीचड़ में चलना पड़ता है मामला MP के सतना जिले की कोठी तहसील की है। यहां मरीज तो बीमार है ही, लेकिन सिस्टम भी लकवाग्रस्त है। दरअसल, गौरैया ग्राम पंचायत के रामपुरा गांव में 20 साल पहले सड़क बनी जो धीरे-धीर बदहाल हो गई। अब उसका नामोनिशान तक नहीं है। बारिश में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
मरीजों को खाट पर लिटाकर कीचड़ में चलना पड़ता है
11 जुलाई को एक वाकया सामने आया। गांव की एक लकवाग्रस्त बुजुर्ग महिला अचानक बीमार पड़ गई। एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन वह कीचड़ भरे खराब रास्ते के कारण अंदर नहीं गई।इसके बाद गांव वालों ने मरीज को खाट पर लिटाया और करीब डेढ़ किमी पैदल कीचड़ में चलकर मेन रोड पर एंबुलेंस तक पहुंचे। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सका।
मंत्री के क्षेत्र में 20 साल से सड़क खराब
खास बात यह है कि यह बदहाल गांव नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है।गांव को मेन रोड से जोड़ने वाला मार्ग बारिश में और बदहाल हो जाता है। मार्ग की हालत इतनी खराब है कि यहां एंबुलेंस भी नहीं आ पाती।
बरसात में गांव तक नहीं पहुंच पाते वाहन
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 100 घरों वाले रामपुरा गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ और फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि एंबुलेंस और अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को चारपाई या कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाती है।
20 साल पहले बनी थी सड़क, फिर नहीं हुई मरम्मत
ग्रामीण दुर्गेश त्रिवेदी ने बताया कि करीब 20 साल पहले लोक निर्माण विभाग ने यहां डब्ल्यूबीएम सड़क बनाई थी। इसके बाद सड़क की कभी मरम्मत नहीं कराई गई। समय के साथ सड़क पूरी तरह उखड़ गई और अब कच्चे रास्ते में तब्दील हो चुकी है।
हर बारिश में टूट जाता है संपर्क
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही गांव का मुख्य सड़क से संपर्क प्रभावित हो जाता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। उनका कहना है कि यदि जल्द पक्की सड़क नहीं बनी तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
महिला सरपंच बोलीं- टेंडर नहीं हुआ
महिला सरपंच गोलू डोहर के मुताबिक, एक साल पहले प्रयास कर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में इस सड़क का नाम जुड़वा दिया गया था, लेकिन अभी तक इसका टेंडर नहीं हुआ। बनने के बाद से इसकी सड़क की कभी मरम्मत नहीं हुई। बरसात में ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग
घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से रामपुरा गांव तक पक्की सड़क का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है।