वैश्विक बाजार में रेयर अर्थ मैटेरियल की मांग दिनों

"रेयर अर्थ मैग्नेट" का विकल्प तलाशेगा भारत

"रेयर अर्थ मेटल" का विकल्प तलाशेगा भारत

चीन द्वारा निर्यात रोके जाने से इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पर संकट

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में "रेयर अर्थ मैटेरियल" की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। मोबाइल, कंप्यूटर और आटो इंडस्ट्री समेत कई उद्योगों में उपयोग में आने वाले इस रेयर अर्थ मैटेरियल के कारोबार में चीन का लगभग एकाधिकार हो गया है। लेकिन अब भारत ने इस मामले में आत्मनिर्भरता की हासिल करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। 

रेयर अर्थ मैटेरियल आज के दौर उद्योगों का मोस्ट डिमांडेड कच्चा माल हो गया है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टर्बाइन, एमआरआई मशीन और रक्षा प्रणालियों जैसे उद्योगों में बहुतायत में उपयोग में आने वाले इस कच्चे माल पर चीन का अधिपत्य हो गया है। इसी का नतीजा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चीन से झुककर ब्यापारिक समझौता समझता करना पड़ रहा है। 

रेयर अर्थ मटेरियल  17 रासायनिक तत्वों का एक कंपाउंड है, जिनमें से अधिकांश लैंथेनाइड श्रेणी में आते हैं।  इन तत्वों में खास चुंबकीय, चमकीले और रासायनिक गुण होते हैं। इन चुंबकीय गुणों के कारण ये अत्याधुनिक उपकरणों जैसे कि स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टर्बाइन, एमआरआई मशीन और रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यक कच्चा माल हो गया है। 

चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात प्रतिबंध के कारण दुनिया भर में उद्योग जगत में उत्पादन लगातार गिर रहा है। इसे देखते हुए भारत के भारी उद्योग मंत्रालय ने वाहन निर्माताओं के साथ शोध परियोजना पर चर्चा कर स्वदेशी  स्वदेशी विकल्पों की तलाश की संभावनाओं पर मंथन शुरू कर दिया है। 

केन्द्र सरकार भारत में फेराइट और रिलक्टेंस मोटर विकसित करने के लिए शोध परियोजना पर विचार कर रही है। मिली जानकारी के मुताबिक भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) इस परियोजना पर चर्चा करने के लिए वाहन निर्माताओं और अन्य हितधारकों की जल्द बैठक बुलाने जा रहा है। फेराइट और रिलक्टेंस मोटरों में हैवी रेयर अर्थ स्थाई मैग्नेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘दरअसल हम इन नए तरह के मोटरों की संभावना तलाश रहे हैं। यह एक शोध परियोजना है। भारी उद्योग मंत्रालय उनके उपयोग के मामलों का अध्ययन कर रहा है। साथ ही इस संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है कि क्या इसके लिए किसी नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।’ इस समय दुनिया के रेयर अर्थ स्थाई मैग्नेट (आरईपीएम) का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन चीन करता है।

रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल कुछ ऑटोमोबाइल कल पुर्जों में होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के ट्रैक्शन मोटर में इसका इस्तेमाल होता है। अप्रैल से चीन ने भारत को आरईपीएम निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग प्रभावित हो रहा है।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, ‘हालांकि यह स्पष्ट है कि अभी आरईपीएम का कोई विकल्प नहीं है, जिसमें इसी तरह की दक्षता हो। लेकिन हमें अन्य देशों पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए विकल्प देखने की जरूरत है। इसलिए हम हितधारकों के साथ एक बैठक बुलाएंगे और आकलन करेंगे कि भारी उद्योग मंत्रालय क्या कर सकता है।’

रिलक्टेंस मोटर बिना किसी स्थाई मैग्नेट के काम करती है। इसके आयरन रोटर को इस तरह आकार दिया जाता है कि चुंबकीय प्रवाह लगातार इसे कम प्रतिरोध की स्थिति में खींचता है, जिससे टॉर्क उत्पन्न होता है। चूंकि यह केवल स्टेटर क्षेत्र और आयरन रोटर के बीच चुंबकीय खिंचाव पर निर्भर है, इसलिए इसे दुर्लभ धातु की आवश्यकता नहीं होती है। ये मोटर सस्ते और बनाने में सरल होते हैं, लेकिन आमतौर पर कम टॉर्क डेंसिटी प्रदान करते हैं और मैग्नेट आधारित मोटरों की तुलना में अधिक शोर कर सकते हैं। वहीं फेराइट मोटर में मैग्नेट का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें नियोडियम जैसी दुर्लभ धातु का इस्तेमाल किया जाता है।