रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में हाईकोर्ट द्वारा गुर

पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम पर कस सकता है सुप्रीम कोर्ट शिकंजा, SC ने जारी किया नोटिस

रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है.सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में गुरमीत राम रहीम और सीबीआई से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार किए जाने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया 

दोनों पक्षों से आठ हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है. अदालत ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी. इस याचिका को रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने दाखिल किया है और इसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें राम रहीम को हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था.

हाईकोर्ट ने पलट दिया था उम्रकैद का फैसला

दरअसल, मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं. इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पलट दिया था. हालांकि, इस मामले में शामिल तीन अन्य दोषियों की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था.

पत्रकार हत्याकांड

बता दें कि रामचंद्र छत्रपति की हत्या अक्टूबर 2002 में हुई थी. उन्हें उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी. गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही. इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की मौत हो गई थी. उनकी हत्या के बाद यह मामला लंबे समय तक जांच और कानूनी कार्रवाई के दौर से गुजरता रहा.

रामचंद्र छत्रपति के बेटे की ओर से याचिका

अब रामचंद्र छत्रपति के बेटे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले में अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट नहीं आई है. अदालत ने फिलहाल राम रहीम और CBI को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है. ऐसे में अब सबकी नजर नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर है और यह तय करेगा कि हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है.