राम मंदिर चढ़ावा: SIT रिपोर्ट में खुलासा, नोटों की गड्डियां छिपाते दिखे आरोपी
राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्राइमरी रिपोर्ट सामने आ गई। इस रिपोर्ट के अनुसार 27 अप्रैल से 5 जून के बीच CCTV में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं कैद हुईं। फुटेज में पुलिस की गिरफ्त में आए 8 आरोपी नोटों की गड्डियां जेब और जूतों में छिपाते हुए नजर आए। SIT ने डॉ. अनिल मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए। SIT ने कहा कि पहले से बनाए गए तलाशी के सिस्टम में लूपहोल्स के लिए अनिल मिश्रा जिम्मेदार हैं।
अनिल मिश्रा को बताया दोषी
इधर, चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू बिना किसी आदेश के गिनती वाले कमरे की चाबी अपने पास रखता था। इतना ही नहीं उसने सिफारिश कर अपने भतीजे मनीष यादव को चंदे की गिनती के काम में लगवा दिया था। रिपोर्ट में कहा गया तलाशी न किए जाने की जानकारी अनिल मिश्रा को आंतरिक माध्यमों से दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोई असरदार लिखित आदेश जारी नहीं किया। पहले तय किए गए तलाशी लेने वाले सिस्टम में भी अनिल के कारण ही हीला-हवाली की गई।
SIT को मिले सबूत
SIT ने कहा - कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान कमरे में ले जाने पर रोक, दानपेटियों, उनसे निकले पैसों-नोटों का रिकॉर्ड, डेली रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं लागू करने ठोस कदम नहीं उठाए गए। कमजोर निगरानी होने से आरोपियों की नीयत बिगड़ी और वे रामलला के खजाने से चोरी करते रहे। SIT के अनुसार, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा की पहली नजर में ही संलिप्त नजर आए। CCTV फुटेज, बरामदगी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं।
अविनाश के पास में लाखों रुपए
सूत्रों के मुताबिक एक आरोपी अविनाश ने यह बात कबूल कर ली कि उसने अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों पर 19 लाख रुपए खर्च किए। उसने भाई की शादी के जश्न के लिए लगभग 6 लाख रु खर्च किए। दूसरे भाई को 5 लाख दिए। 3.5 लाख की कार भी खरीदी। बता दे राममंदिर के चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए UP सरकार ने SIT बनाई थी। टीम ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। कल ट्रस्ट की बैठक के बाद वीडियो शेयर किया गया जिसमें राम मंदिर को दान में मिली इन चीजों के चोरी होने का आरोप लगाया गया था, लेकिन सभी चीजें सुरक्षित मिलीं।