राजनाथ सिंह ने लेह से गलवान युद्ध स्मारक का किया वर्चुअल उद्घाटन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को गलवान गलवान घाटी में "गलवान युद्ध स्मारक" का वर्चुअल उद्घाटन किया और गलवान घाटी संघर्ष में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों को श्रद्धांजली दी। लेह आर्मी बेस पर आयोजित समारोह के दौरान उन्होंने कहा, "हमारे सैनिकों की बहादुरी हम सभी के लिए प्रेरणा है।"
स्मारक का विशेष महत्व बताते हुए तृतीय इन्फैंट्री डिवीजन के GOC मेजर जनरल अरिंदम साहा ने कहा, "14,500 फीट की ऊंचाई पर बना यह गलवान युद्ध स्मारक अपनी तरह का सबसे ऊंचा स्मारक है और राष्ट्रीय कृतज्ञता का एक शक्तिशाली प्रतीक है।"
20 वीर सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि है गलवान युद्ध स्मारक
मेजर जनरल अरिंदम साहा ने आगे कहा कि, "यह हमारे उन 20 वीर सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में झड़प के दौरान अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। पिछले सेना दिवस पर, रक्षा मंत्री ने इस स्मारक के निर्माण की घोषणा की थी। 14,500 फीट की ऊँचाई पर ऐसी संरचना का निर्माण कोई साधारण कार्य नहीं है, लेकिन बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने इसे सीमित समय में पूरा कर दिखाया।
मेजर जनरल ने ज़ोर देकर कहा कि यह स्मारक अपने वीरों के सम्मान के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "यह दुनिया के लिए भी एक संदेश है कि भारत अपने शहीदों को याद करता है और उनका सम्मान करता है।"
गलवान युद्ध स्मारक 125 BRO परियोजनाओं का है हिस्सा
यह उद्घाटन रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा अनावरण की गई 125 BRO परियोजनाओं का हिस्सा था। इनमें सात राज्यों - राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, मिज़ोरम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 28 सड़कें, 93 पुल और 4 रणनीतिक परियोजनाएँ शामिल हैं।
कनेक्टिविटी केवल नेटवर्क नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि, "आज हमारे सैनिक कठिन इलाकों में मजबूती से खड़े हैं क्योंकि उनके पास सड़कें, वास्तविक समय संचार प्रणाली, उपग्रह सहायता, निगरानी नेटवर्क और रसद कनेक्टिविटी तक पहुंच है। सीमा पर तैनात एक सैनिक का हर मिनट, हर सेकंड बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए, कनेक्टिविटी को केवल नेटवर्क, ऑप्टिकल फाइबर, ड्रोन और रडार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ के रूप में देखा जाना चाहिए।"
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