पंजाब में नशामुक्ति अभियान 'युद्ध नशों विरुद्ध' को

पंजाब में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को मिली नई धार, गांव स्तर पर लागू हुआ ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान

पंजाब में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को मिली नई धार, गांव स्तर पर लागू हुआ ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान

पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ को और प्रभावी बनाने के लिए भगवंत मान सरकार ने जमीनी स्तर पर एक नई कार्ययोजना लागू की है। सरकार ने ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य गांव-गांव तक नशा विरोधी मुहिम को मजबूत करना और आम लोगों को इस सामाजिक लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनाना है।

यह एक्शन प्लान जून महीने में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक ‘गांवों का हाल, सीएम के साथ’ के दौरान तैयार किया गया था। योजना के तहत विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल, नियमित निगरानी और राज्यभर में लगातार जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

पंजाब सीएम भगवंत मान

गांव स्तर पर तैयार होगी नशा विरोधी रणनीति

‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान का मुख्य उद्देश्य नशे के खिलाफ अभियान को गांव स्तर तक पहुंचाना है। इसके तहत प्रत्येक गांव के लिए विशेष नशा विरोधी रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला और राज्य स्तर पर समीक्षा बैठकों के माध्यम से अभियान की प्रगति की निगरानी की जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाए।

‘नशा मुक्ति मोर्चा’ बना अभियान का आधार

इस पूरी मुहिम का प्रमुख आधार ‘नशा मुक्ति मोर्चा’ है, जिसका गठन 15 अप्रैल 2025 को किया गया था। इसके माध्यम से पांच प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू किए गए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अहम कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं। ये कोऑर्डिनेटर जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और नशे की रोकथाम से जुड़ी गतिविधियों को मजबूत करने में भूमिका निभा रहे हैं।

1.25 लाख ग्राम रक्षा समिति सदस्य भी अभियान में शामिल

पंजाब में वर्तमान समय में 1,708 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सक्रिय हैं, जो 1.25 लाख से अधिक ग्राम रक्षा समिति सदस्यों के साथ मिलकर नशे के खिलाफ जनजागरूकता फैला रहे हैं।

इनके माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। साथ ही परिवारों को नशा पीड़ित सदस्यों का समय पर इलाज कराने और नशा तस्करों के खिलाफ सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जिलावार समीक्षा बैठकों से होगी निगरानी

अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए पूरे पंजाब में जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, ग्राम रक्षा समिति के सदस्य और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी शामिल हो रहे हैं।

इन बैठकों का उद्देश्य स्थानीय स्तर की चुनौतियों की पहचान करना, अभियान को और प्रभावी बनाना तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

जिला-वार समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत 6 जुलाई को तरनतारन, अमृतसर (शहरी) और अमृतसर (ग्रामीण) से हुई। इसके बाद गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, एसबीएस नगर, रूपनगर, एसएएस नगर और पटियाला में बैठकें आयोजित की गईं।

आगे 11 से 15 जुलाई के बीच संगरूर, बरनाला, बठिंडा, मानसा, श्री मुक्तसर साहिब, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना और फतेहगढ़ साहिब सहित अन्य जिलों में समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।

नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की कोशिश

प्रतीकात्मक तस्वीर

भगवंत मान सरकार का कहना है कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर की संस्थाओं, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

सरकार का लक्ष्य है कि ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों के नेटवर्क को और मजबूत कर पंजाब में नशे के खिलाफ एक स्थायी सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जाए और राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।